गोल्डन कार्ड की समस्याओं के समाधान को लेकर शासन और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बीच बैठक, इन मांगों पर बनी सहमति
राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड) के संचालन में आ रही विभिन्न समस्याओं एवं विसंगतियों के निराकरण के लिए स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पाण्डेय की अध्यक्षता में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल की बैठक होनी थी। उनके अन्य बैठक में व्यस्त होने के कारण अपर सचिव स्वास्थ्य रोहित मीणा की अध्यक्षता में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परिषद की बैठक हुई। इसमें परिषद की कई मांगों पर सहमति बनी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक का उद्देश्य प्रदेश के कार्मिकों एवं पेंशनरों को गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत बेहतर एवं निर्बाध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। बैठक में परिषद की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने समस्याओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के लगातार प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को गोल्डन कार्ड के माध्यम से कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान समय में योजना अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना कर रही है। कई पंजीकृत चिकित्सालय कैशलेस उपचार देने से इंकार कर रहे हैं। इसके साथ ही ओपीडी चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं अन्य भुगतान अत्यधिक विलंब से किए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों एवं पेंशनरों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद की ओर से बैठक में यह भी बताया कि वर्तमान में योजना के संचालन में आने वाले अधिकांश व्यय का वहन कर्मचारियों के अंशदान से किया जा रहा है। वहीं, इस योजना के लागू करते समय यह अपेक्षा की गई थी कि राज्य सरकार भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए आवश्यक वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। परिषद ने स्पष्ट किया कि केवल कर्मचारियों के अंशदान के आधार पर इतनी बड़ी स्वास्थ्य योजना का संचालन संभव नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद की ओर से प्रस्तुत तथ्यों एवं सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए अपर सचिव स्वास्थ्य रोहित मीणा ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सकारात्मक रुख अपनाया। बैठक में सहमति बनी कि गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत आने वाले व्यय के लिए शासन अपना अंशदान सुनिश्चित करेगा। चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं अन्य लंबित भुगतानों के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही योजना के संचालन हेतु एक निश्चित क्रेडिट लिमिट निर्धारित की जाएगी। उससे अधिक व्यय होने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था शासन स्तर पर की जाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में परिषद ने यह भी मांग उठाई कि गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत पंजीकृत चिकित्सालय भुगतान में देरी होने के बावजूद मरीजों को उपचार देने से इंकार न करें। इस पर शासन स्तर पर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रावधानों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया। परिषद ने यह भी मांग की कि योजना के संचालन में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस संबंध में बैठक में ग्रीवेंस रिड्रेसल कमेटी गठित करने तथा कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप नंबर जारी करने पर सहमति बनी। साथ ही समय-समय पर परिषद, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग एवं अस्पताल प्रबंधन के बीच समीक्षा बैठकें आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में अस्पतालों द्वारा की जा रही कथित ओवर बिलिंग तथा भुगतान संबंधी पारदर्शिता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। परिषद की मांग पर सहमति बनी कि योजना की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट परिषद को उपलब्ध कराई जाएगी। उसे सार्वजनिक पारदर्शिता के लिए पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष नियमित ऑडिट कराने तथा चिकित्सा बिलों का परीक्षण विषय विशेषज्ञों द्वारा कराने पर भी सहमति व्यक्त की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद ने गोल्डन कार्ड के अंतर्गत जांच सुविधाओं का दायरा बढ़ाने, प्रतिष्ठित जांच प्रयोगशालाओं को योजना से जोड़ने के साथ ही अधिक से अधिक पैनल अस्पतालों को शामिल करने की मांग भी रखी। इसे शासन की ओर से स्वीकार किया गया। इसके साथ ही बड़े अस्पतालों में गोल्डन कार्ड धारकों के लिए पृथक काउंटर स्थापित करने एवं सुविधाओं का विस्तार करने का निर्णय लिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गोल्डन कार्ड धारकों के आश्रितों के लिए निर्धारित 25 वर्ष की आयु सीमा समाप्त करने पर भी सहमति बनी। तथा इस संबंध में शीघ्र आदेश जारी करने का आश्वासन दिया गया। इसके अतिरिक्त गंभीर एवं असाध्य बीमारियों के उपचार में वास्तविक व्यय के आधार पर शिथिलीकरण की व्यवस्था लागू करने की मांग को भी स्वीकार करते हुए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की बात कही गई। बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत चिकित्सा सुविधाओं का पर्याप्त विस्तार नहीं हो जाता, कर्मचारियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक योजना का प्रीमियम बढ़ाने पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में परिषद की ओर से अध्यक्ष अरुण पांडे के साथ ही महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट, कोषाध्यक्ष रविन्द्र चौहान, प्रदेश प्रवक्ता हर्ष जोशी ने कर्मचारियों एवं पेंशनरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। वहीं शासन की ओर से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक वित्त अभिषेक आनंद, क्लेम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी, उप सचिव व्योमकेश दुबे, अनुभाग अधिकारी अजयपाल बेलवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


