जानिए संक्रमण के पहले दिन क्यों निगेटिव आती है ज्यादातर लोगों की कोरोना रिपोर्ट, क्यों जरूरी है सात दिन का आइसोलेशन
देश में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं, कोरोना रिपोर्ट को लेकर भी कई तथ्य सामने आए हैं। पहले दिन कोरोना का रिपोर्ट क्यों निगेटिव आती है। क्यों सात दिन तक आइसोलेशन की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञ देते हैं।
देश में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं, कोरोना रिपोर्ट को लेकर भी कई तथ्य सामने आए हैं। पहले दिन कोरोना का रिपोर्ट क्यों निगेटिव आती है। क्यों सात दिन तक आइसोलेशन की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञ देते हैं। हम यहां इसकी भी जानकारी दे रहे हैं। भारत में कोविड-19 मामलों में पिछले 24 घंटों में 27 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। गुरुवार 13 जनवरी की सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दिन में देश में 247417 नए कोरोना केस दर्ज हुए हैं। इस अवधि में 380 मरीजों की मौत हुई है। बता दें कि बुधवार को देश में कुल 194720 केस दर्ज हुए थे। पिछले 24 घंटे में 7632024 वैक्सीन की डोज दी गई है। अब तक कुल 1546139465 वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं।संक्रमित के संपर्क में आने पर कई बार पहले दिन टेस्ट में आती है निगेटिव रिपोर्ट
कई बार कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने के बाद यदि कोई टेस्ट कराता है तो उसकी रिपोर्ट निगेटिव आती है। इस कारणों की केंद्र सरकार ने जानकारी दी। साथ ही बताया कि क्यों सात दिन तक होम आइसोलेशन की सलाह दी जा रही है। हालांकि कोरोना का नया वैरिएंट तेजी से फैल रहा है और माना जा रहा है कि ये ज्यादा खतरनाक नहीं है। फिर भी विशेषज्ञ होम आइसोलेशन की सलाह दे रहे हैं। वे संक्रमित के संपर्क में आने पर यदि लक्षण या परेशानी न हो तो टेस्ट न कराने की भी सलाह दे रहे हैं। साथ ही होम आइसोलेशन के बाद भी टेस्ट न कराने को कह रहे हैं। सिर्फ टेस्ट जोखिम वाले व्यक्तियों को ही कराने की सलाह दी जा रही है।
देरी से पता चलता है संक्रमण का
केंद्र सरकार ने कहा कि रैपिड एंटीजन जांच और घर पर की गई एंटीजन जांच समेत ‘लेटरल फ्लो’ जांच के द्वारा, वायरस से संक्रमित होने के तीसरे दिन से आठवें दिन तक कोविड का पता चल सकता है। आरटी पीसीआर जांच से 20 दिन तक संक्रमण का पता चल सकता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चाहे किसी भी प्रकार की जांच करवाई जाए, संक्रमण के पहले दिन उसका नतीजा ‘निगेटिव’ आएगा।
ये है कारण
भार्गव ने कहा कि वायरस को आपके शरीर में बढ़ने में समय लगता है और इसे लेटेंट पीरियड’ कहा जाता है। तीसरे दिन से आठवें दिन तक यह लेटरल फ्लो जांच में सामने आएगा। जो इंफेक्शियस पीरियड’ होता है।
उन्होंने कहा कि इसीलिए अस्पताल से छूटने और घर पर होम आइसोलेशन में रखने की नीति सात दिन की अवधि पर केंद्रित होती है। उन्होंने कहा कि आरटीपीसीआर जांच के नतीजे आठवें दिन के बाद भी पॉजिटिव आते हैं, क्योंकि कुछ आरएनए कण जो कि संक्रमित नहीं करते, उनसे जांच में संक्रमण की पुष्टि होती है। आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा कि वायरस के ओमीक्रॉन स्वरूप के लिए लेटरल फ्लो जांच आधार बन चुका है। भार्गव ने कहा कि सरकारी परामर्श के अनुसार, संक्रमितों के संपर्क में आने वाले उन लोगों को, जिन्हें उम्र या बीमारी के आधार पर चिह्नित किया गया है, उन्हें टेस्ट की जरूरत है। अंतरराज्यीय यात्रा करने वाले लोगों को जांच करवाने की जरूरत नहीं है।



