प्रख्यात निशानेबाज जसपाल राणा का निधन, जर्मनी से लौटते समय बिगड़ी थी तबीयत
भारत के प्रख्यात निशानेबाज जसपाल राणा का आज शुक्रवार 12 जून को करीब 50 साल की उम्र में निधन हो गया। छह दिन बाद उनका जन्मदिन था। उत्तराखंड निवासी जसपाल राणा की एक जून को जर्मनी से लौटते समय फ्लाइट में तबीयत बिगड़ी थी। जानकारी मिली है कि म्यूनिख में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय उन्हें कुछ असहज महसूस हुआ। नई दिल्ली पहुंचते ही राणा को साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनके हार्ट में स्टेंट डाला गया था। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कालीकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की पुष्टि की। राणा भारत के पिस्टल शूटर्स के हाई परफॉर्मेंस कोच की भूमिका निभा रहे थे। उनके निधन पर खेल जगत से जुड़े लोगों के साथ ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी शोक जताया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को हुआ था। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से ताल्लुक रखने वाले भारत के महानतम पिस्टल निशानेबाजों और कोचों में से एक जसपाल राणा को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री, 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके पिता नारायण सिंह राणा 1971 के युद्ध के अनुभवी सैनिक हैं, जिन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में सेवा की और बाद में 2000 में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री बने। उनके पिता को भी शूटिंग खेलों में रुचि थी और वे जसपाल के पहले कोच थे। जसपाल के दो भाई-बहन हैं, सुषमा सिंह (राणा) और सुभाष राणा। दोनों ही कुशल निशानेबाज हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कॉमनवैल्थ गेम्स में नौ बार जीते गोल्ड मेडल
जसपाल राणा ने कॉमनवैल्थ गेम्स में 9 बार गोल्ड मेडल जीते थे। एशियन गेम्स में वे लगातार 4 बार गोल्ड मेडलिस्ट रहे थे। राणा पेरिस ओलिंपिक में डबल ओलिंपिक मेडल जीतने वाली शूटर मनु भाकर के कोच भी थे। उन्हें फरवरी 2025 में 25 मीटर पिस्टल के लिए भारतीय जूनियर टीम का हाई परफार्मेंस कोच बनाया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जसपाल राणा ने कॉमनवैल्थ और एशियन गेम्स को मिलाकर कुल 23 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें एशियन गेम्स में 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 8 मेडल थे। वहीं, कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज को मिलाकर कुल 15 मेडल जीते थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में किया था सबसे यादगार प्रदर्शन
जसपाल राणा ने अपने करियर में कई मेडल जीते, लेकिन 1994 में मिलान में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप की उनकी जीत सबसे यादगार मानी जाती है। इस प्रतियोगिता से एक दिन पहले उनके घुटने में फोड़ा हो गया था और वह अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी और उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, जसपाल और उनके कोच सनी थॉमस ने तय किया कि वे अस्पताल से निकलकर प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अस्पताल से निकलने के बाद उसी रात फोड़ा फूट गया, जिससे उनका दर्द और बढ़ गया। हालत ऐसी थी कि वह अपनी जींस तक नहीं उतार पा रहे थे। बाद में उन्होंने जींस को फाड़कर हाफ पैंट बनाई और उसी में अगली सुबह प्रतियोगिता में उतरे। दर्द के बावजूद उन्होंने जूनियर वर्ग में वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कोर के साथ अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीता। इसी वर्ष उन्होंने हिरोशिमा एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया और महज 18 साल की उम्र में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित हुए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
10 साल की उम्र से शूटिंग सिखाई
जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा ने 10 साल की उम्र में ही जसपाल को पिस्टल और राइफल शूटिंग के बारे में बताया। जसपाल ने शुरुआत में पिस्टल और राइफल दोनों से अभ्यास किया, लेकिन बाद में फेडरेशन ने एक इवेंट के लिए एक ही शूटर चुनने का नियम लागू किया, जिसके बाद उन्होंने पिस्टल शूटिंग को चुना। जसपाल 11-12 साल की उम्र तक ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे थे। 1988 में सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित 31वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। साल 2009 में जसपाल राणा ने टिहरी संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था, लेकिन तब के कांग्रेस प्रत्याशी विजय बहुगुणा से चुनाव हार गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
खेल करियर और उपलब्धियां
राष्ट्रमंडल खेल: राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में 15 पदक (9 स्वर्ण, 4 रजत, 2 कांस्य) जीतकर वह भारत के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं।
एशियाई खेल: 1994 हिरोशिमा और 2006 दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने कई स्वर्ण पदक अपने नाम किए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
विश्व चैंपियनशिप: 1994 में मिलान में आयोजित जूनियर विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक और विश्व रिकॉर्ड बनाया। अपने करियर में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 600 से अधिक पदक अर्जित किए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कोचिंग और योगदान
जसपाल राणा ने खेल से संन्यास लेने के बाद एक सफल कोच के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने मनु भाकर, सौरभ चौधरी और अनीश भनवाला जैसे युवा निशानेबाजों को विश्वस्तरीय मुकाबलों के लिए तैयार किया। 2024 पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर की ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनका मुख्य मार्गदर्शन रहा है। मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल (महिला एकल) में 221.7 अंक हासिल कर कांस्य पदक जीता था। वह ओलंपिक में शूटिंग स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 10 मीटर एयर पिस्टल (मिश्रित टीम) में सरबजोत सिंह के साथ जोड़ी बनाकर उन्होंने तुर्की के खिलाड़ियों को हराकर देश के लिए दूसरा कांस्य पदक हासिल किया था।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


