सीटू जिला कमेटी की आम बैठक: मोदी की मजदूर विरोधी नीति का विरोध, चुनाव में सबक सिखाने का संकल्प
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) की देहरादून की आम बैठक कांवली रोड स्थित लाल झंडा कार्यालय के सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता कृष्ण गुनियाल ने की और संचालन जिला महामंत्री लेखराज ने किया। बैठक में केंद्र सरकार की मजदूर विरोध नीति का कड़ा विरोध किया गया। साथ ही संकल्प किया गया कि इस सरकार को लोकसभा चुनाव में सबक सिखाया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर सीटू महामंत्री लेखराज ने कहा कि वर्ष 2020 में जब पूरी दुनिया में करोना से त्राहि त्राहि मची थी, उस समय महामारी को अवसर में बदलते हुए मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों में से 29 प्रभावशाली श्रम कानूनों के स्थान पर 4 श्रम संहिताएं संसद में बगैर किसी चर्चा के पारित कर दी। ये सब कारपोरेट के पक्ष में बनाई गई हैं। इसका पूरे देशभर के मजदूर विरोध कर रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा वर्कर्स, भोजनमाताओ ने मानदेय बढ़ाने के लिए आंदोलन किये, किन्तु डबल इंजन की उत्तराखंड में धामी सरकार ने इस सम्बंध में कोई भी मांग पूरी नही की। इससे स्कीम वर्कर्स में सरकार के प्रति अविश्वास पैदा हो गया है। उन्होंने भाजपा को वोट न देने का संकल्प लिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से रेहड़ी पटरी व्यवसायियों का उत्पीड़न उन्हें याद है। ई रिक्शा चालकों के उत्पीड़न का सवाल हो, चाहे 26 हजार न्यूनतम वेतन देने की मांग हो। इन मुद्दों को मजदूर नही भूलेगा। उन्हीं सब मुद्दों पर इस बार वोटिंग होगी। सीटू के प्रांतीय महामंत्री एमपी जखमोला ने कहा कि कारोना काल के समय मजदूरों की दुर्गति हुई थी। वे भूखे पेट हजारों हजार किलोमीटर पैदल चले थे। वे अपने घायल पैरों को नही भूलेंगे। साथ ही मोदी और बीजेपी को सबक सिखाएंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सीटू राज्य कमेटी अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। अपना पक्ष मजदूरों के समक्ष रखा जाएगा। इस अवसर पर सभी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में चुनाव में भाजपा को हराने का संकल्प लिया। बैठक में सीटू से संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर रविन्द्र नौडियाल, राम सिंह भंडारी, भगवंत पयाल, शिवा दुबे, सुनीता रावत, रजनी रावत, मोनिका, लक्ष्मी नारायण, तिलक राज, बुद्धि सिंह चौहान, भगवान सिंह चौहान, गंभीर सिंह पंवार, नरेंद्र सिंह, बलदेव टम्टा, मनिंदर सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, बिजेन्दर कनोजिया आदि ने विचार व्यक्त किये।
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