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June 15, 2026

सीपीएम की राज्य समिति की बैठक में जल, जंगल, जमीन के लिए संघर्ष का निर्णय, मोदी और धामी सरकार की नीतियों की कड़ी निंदा

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की उत्तराखंड राज्य समिति की दो दिवसीय बैठक देहरादून स्थित पार्टी राज्य कार्यालय सभागार में संपन्न हो गई। बैठक में पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य बीजू कृष्णन ने मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में पार्टी की नीतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने वर्तमान मोदी सरकार की जनविरोधी, सांप्रदायिक, कॉरपोरेटपरस्त और अमेरिकापरस्त नीतियों के चलते देश को हो रहे गंभीर नुकसान से बैठक को अवगत कराया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय समिति सदस्य राजेन्द्र नेगी ने की तथा संचालन राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित ने किया। बीजू कृष्णन ने कहा कि केन्द्र सरकार की नीतियाँ पूरी तरह से पूंजीपतियों और अमेरिकी साम्राज्यवादी हितों से प्रेरित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को लूटकर कॉरपोरेट घरानों को सौंप रही है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर रही है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति में अमेरिका की परस्ती के कारण भारत अपनी वैचारिक स्वतंत्रता खो रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के बावजूद किसानों पर अत्याचार जारी है और MSP को कानूनी गारंटी न देना केंद्र की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। बैठक में उत्तराखंड में जल, जंगल और जमीन के सवालों को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया। पार्टी ने कहा कि पहाड़ी व मैदानी जिलों में बढ़ती जल संकट, अवैध खनन, वनों की कटाई और किसानों से जमीन छीनने की प्रवृत्ति के खिलाफ सड़कों पर उतरा जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक में कहा गया कि पहाड के जंगलों व शहरों में झुग्गी, झोपडियों, नदी, नालो, चायबागानों में बसी गरीब आबादी की बेदखली के प्रयास हो रहे हैं। साथ ही भूमाफियाओं की ओर से जगह जगह जमीनों पर अवैध कब्जे तथा फर्जी तौर पर अपने नाम करने के हथकंडे किए जा रहे हैं। खासकर पछवादून में इस तरह के मामले बडी संख्या में हैं, जहाँ इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे पार्टी नेताओं पर एक के बाद एक झूठे मुकदमे किए गए। इसके खिलाफ पार्टी राज्य सचिवालय का घेराव करेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रस्ताव में कहा गया कि राज्य सरकार स्थानीय लोगों के बुनियादी अधिकारों पर हमलावर है। पलायन, बेरोजगारी, बदहाल सड़कें और शराब की नीति तथा बढती नशाखोरी ने राज्य को तबाह कर दिया है। पार्टी ने घोषणा की कि वह जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए जन आंदोलन खड़ा करेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

बैठक में राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार की जनविरोधी और सांप्रदायिक नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई। आरोप लगाया गया कि सरकार ने ग़ैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) का इस्तेमाल आम नागरिकों और आंदोलनकारियों के खिलाफ हथियार की तरह किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक में कहा गया कि हरिद्वार, देहरादून समेत राज्य भर में बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण से सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। इस मौके पर सरकार के बजट को पूंजीपतियों के लिए नज़राना और गरीबों के लिए अभिशाप बताया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक के अंत में राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित ने सभी कार्यकर्ताओं से मुद्दों को लेकर जन-जन तक पहुँचने और पार्टी को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “जब तक जल, जंगल और जमीन पर लोगों का अधिकार सुरक्षित नहीं होगा, पार्टी का यह संघर्ष जारी रहेगा (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक में लिए गए ये निर्णय
1- राज्य भर में बिगडती कानून व्यवस्था,जल संकट, वन विनाश और भूमाफियाओं के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
2– शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के क्षेत्र में निजीकरण के खिलाफ मुहिम जारी रखी जाएगी।
3- पार्टी ने जिलों और ब्लॉकों में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने का निर्णय लिया गया
4- केंद्र और राज्य में भाजपा को हराने के लिऐ वामपंथी अन्य विपक्षी दलों से समन्वय स्थापित करते हुए व्यापक संघर्ष करने का निर्णय लिया गया।
5 पार्टी आगामी दिनों भूमि के सवाल पर सचिवालय पर विशाल जलूस निकालेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये रहे उपस्थित
बैठक में महेंद्र जखमोला, भूपालसिंह रावत, शिवपसाद देवली, लेखराज, नितिन मलेठा, माला गुरूंग, अनन्त आकाश, मदन मिश्रा, बीरेन्द गोस्वामी, कमरूद्दीन, आर पी जोशी, पुरूषोत्तम बडोनी, सत्ते सिंह, भगवान सिंह राणा, राजा, कमलेश गौड, हिमांशु चौहान, मनमोहन, राजेन्द्र नेगी आदि ने विचार रखे।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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