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July 10, 2026

तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण का समापन, शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधियों को दिया जल गुणवत्ता मापने का दिया प्रशिक्षण

उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क), सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तराखंड शासन की ओर से देहरादून में यूसर्क सभागार में तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण का आज समापन हो गया।

उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क), सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तराखंड शासन की ओर से देहरादून में यूसर्क सभागार में तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण का आज समापन हो गया। तकनीकी सत्र के प्रारंभ में यूसर्क के वैज्ञानिक डा भवतोष शर्मा ने उपस्थित पांच शिक्षण संस्थाओं के 25 प्रतिभागियों को जल की कठोरता, क्लोराइड, एल्किनिटी, बीओडी, डीओ, पीएच, डीडीएस, टर्बडिटी आदि की जांच का प्रशिक्षण दिया।
तकनीकी सत्र का प्रथम व्याख्यान केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्लूबी) जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) के वरिष्ठ हाइड्रोजियोलाजिस्ट रवि कल्याण बूसा ने दिया। उन्होंने हाइड्रोलाजिस्ट का सिनेरियो आफ उत्तराखंड विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य के भूजल की स्थिति, जियोलाजी, एक्वीफर की उपस्थिति, एक्वीफर के प्रकार, पहाड़ी एवं तराई भूभाग के एक्वीफर्स, भूजल की गुणवत्ता एवं उपलब्धता आदि विषयों पर विस्तार से वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की एवं प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड में वर्षाजल संचयन कृत्रिम भूजल पुनर्भरण, भूजल रिचार्ज की विभिन्न जियोलाजी आधारित तकनीकों पर प्रकाश डाला।
तकीनीकी सत्र का द्वितीय व्याख्यान राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रूड़की (जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा मुकेश शर्मा ने ‘वाटर क्वालिटी ऐसेसमेन्ट’ विषय पर दिया। उन्होंने जल की गुणवत्ता के वैज्ञानिक ढंग से अनुश्रवण करने एवं जल के विभिन्न पैरामीटर्स पर व्याख्यान दिया। डा0 शर्मा ने घरेलू जल की गुणवत्ता, कृषि में प्रयोग होने वाले जल की गुणवत्ता, भूजल एवं सतही जल की गुणवत्ता के अध्ययन विषय पर विस्तार से बताया तथा उत्तराखण्ड राज्य के साथ-साथ भारत के अन्य राज्यों के जल स्रातों की गुणवत्ता तथा गुणवत्ता विषयक विभिन्न वैज्ञानिक समाधान भी बताये।

कार्यक्रम में यूसर्क के वैज्ञानिक डा राजेन्द्र सिंह राणा ने ‘जल प्रदूषण पैरामीटरर्स तथा उनके मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों’ को प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया गया। उन्होंने कहा कि किस प्रकार से विषैली हैवी मैटल्स जैसे- आर्सैनिक, क्रोमियम तथा लैड इत्यादि से कैंसर, हार्ट अटैक एवं किडनी की बीमारियां लोगों में धीरे-धीरे फैल रही है।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुये यूसर्क की निदेशक प्रो (डा) अनीता रावत ने कहा कि यूसर्क की ओर से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को जल विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना तथा उन्हें शोध की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करना है। साथ ही साथ राज्य के जल स्रोतों के संरक्षण व अध्ययन कार्य को यूसर्क द्वारा प्रमुखता से चलाया जा रहा है।
निदेशक यूसर्क नेकार्यक्रम में पांच शिक्षण संस्थाओं के 25 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक व यूसर्क के वैज्ञानिक डा भवतोष शर्मा ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन भारत सरकार के अन्तर्गत कार्यरत संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट आफ सायल एण्ड वाटर कंजर्वेशन (आईसीएआर) में हाइड्रोलाजी डिवीजन के विभागध्यक्ष डा पीआर ओजस्वी ने ‘जल विज्ञान’ विषय पर तथा संस्थान के तकनीकी अधिकारी सुरेश चौधरी ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा ‘भूमि संरक्षण’ विषय पर व्याख्यान दिया। प्रशिक्षणार्थियों को संस्थान का भ्रमण भी कराया गया।
कार्यक्रम के अन्त में वैज्ञानिक यूसर्क डा मन्जू सुन्दरियाल ने समस्त विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में डा राजेन्द्र सिंह राणा, आईसीटी टीम के ई. राजदीप जंग, शिवानी पोखरियाल, हरीश प्रसाद ममगांई, राजीव बहुगुणा, रमेश रावत सहित 40 लोगों ने प्रतिभाग किया।