अलग नहीं तुमसे हूँ मैं दो भले सबको लगें हम, पर अलग नहीं तुमसे हूँ मैं । साज तुम जो...
नारी मंच
वसन्त ऋतु सज-धज कर जिसमें धरती दुल्हन सी बन जाती है सब ऋतुओं में यही ऋतु तो वसन्त ऋतु कहलाती...
एक दिन पूछ बैठे खुद से सवाल तो ज़वाब मे ख्याल उसका आ गया, कोशिश की साझा कर लूं उलझनों...
शिकायत रही तुम्हें हर दर्द तेरा अपना लिया हमने फिर भी शिकायत रही तुम्हें खुशियों की खातिर तेरी खुद को...
इतना आसान नहीं होता जनाब एक लड़का हो ना, हजारों गमों के बिच भी होठों पर मुस्कान लाना, घर के...
बरखा (वर्षा) आई तुम तो फैली चारों ओर हरियाली पड़ी बौछार पहली तो जन जीवन में भरी खुशहाली आते ही...
मेरा देश मेरा मुल्क देश की एकता पर कभी आँच आने नहीं देना। दिलों में दूरियां कभी बढाने नहीं देना॥...
चलो आज एक छोटा सा कदम उठाते हैं, अपने अपने हिस्से का एक दूसरे के लिए बराबरी की झलक दिखलाते...
बेटी का विवाह आंगन की फुलवारी में, फूल सी बिटिया को बड़ा किया। पर एक दिन आया ऐसा, माँ बाप...
दर्द अब दुबारा सहा जाएगा नहीं कभी कुछ बात याद आ जाये, या कोई लम्हा याद दिला जाये तो, मुझे...
