वर्ष इकहत्तर के युद्ध मेंवर्ष इकहत्तर की युद्ध में, दुश्मन को हम ने रौंद दिया,सोलह दिसंबर इसी दिवस, बांग्लादेश ने...
साहित्य जगत
मैं गीत तेरे… सुन मौतजरा थमकर आना…मैं गीततेरे ही गुनता रहा… मैं गीत तेरे ही…सुन मौत जरा… सब गीत तो...
आसान नहीं दुल्हे राजा होना कितना मुश्किल है किसी का आज शौहर होना।शिक्षा दौलत नियमित आय बराबर होना।। शादी को...
हम भी किसान रहे हैं। सर पर कर्ज़ पीठ पर कोड़ों के निशान रहे हैं।वो उतने पूजे गए जो जितने...
शादियों का सीजन आया और निपट भी गया। यदि अपने परिवार की शादी न हो तो पता ही नहीं चलता...
हिमालय के आंचल में मध्य हिमालय के आंचल में, दो सम ऐसे नगर बसे ,एक हिमाचल एक उत्तरांचल चंबा जिनके...
गा लो जैसे मर्जी जितनी मर्जीएकदम सटीक बात है… अपना TIME आएगा… जब अपना TIME आएगा…२तब सबको पता चल जाएगा…२...
किसान खड़ा है, सड़कों पर ! मिलजुल कर सब काम करो, व्यर्थ ना बकवास करो !किसान खड़ा सड़कों पर है,...
कविता दिन-भर थकान जैसी थी और रात में नींद की तरह/ सुबह पूछती हुई, क्या तुमने खाना खाया रात को।...
https://youtu.be/4xAbdvyNe1k हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर मंगलेश डबराल को उनकी रचना के साथ श्रद्धांजलि। मंगलेश डबराल की इस रचना-बची हुई...
