Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

October 28, 2026

साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी की कविता-हिमालय के आंचल में

हिमालय के आंचल में

मध्य हिमालय के आंचल में, दो सम ऐसे नगर बसे ,
एक हिमाचल एक उत्तरांचल चंबा जिनके नाम पड़े।
मध्य हिमालय के ————
वीर भूमि उत्तरांचल चंबा में, दो पुष्प पारिजात खिले ,
एक गबर सिंह एक सुमन श्री, जिनके नाम अमर हुए ।
मध्य हिमालय के———–
प्रथम परमवीर महा समर सेनानी, विश्वयुद्ध शहीद हुए ,
क्रांति पथ पर कदम बढ़ाते श्रीदेव सुमन बलिदान किए।
मध्य हिमालय के————-
उन वीर बलिदानियों के नाम से शीश हिमालय उठता है,
अभिनंदन कर उन वीरों का, नतमस्तक सिर जन होता है।
मध्य हिमालय के————-
मंजूड जौल में जन्मे नायक, विश्व क्षितिज पर दमक रहे,
पिंड- सूर्य अंबर प्रकाशित ,धरा दीप बन द्वय चमक रहे।
मध्य हिमालय के————
गढ़ वीरों की इस पावन धरती पर , ये वीर धीर उत्पन्न हुये,
शौर्य – उत्सर्ग की अमर कथा, जन मन को है आवर्त किए।
मध्य हिमालय के————-
एक वीर वी सी गबर सिंह था,था बलिदानी श्री देव सुमन ।
इन वीरों की विश्व विजय ने, मोह लिया है जग सबका मन ।
मध्य हिमालय के ————
समय-समय पर तुम्हें सलामी ,श्रद्धांजलि भी हम देते हैं ।
बैसाख आठ, सावन सात को,नमन सब आपका करते हैं ।
मध्य हिमालय के————-
वीर गबर सिंह खड़ा है सीना ताने,चंबा चौक चौराहे पर।
ललकार है परम वीर वह, नित मर मिटने को माटी पर ।
मध्य हिमालय के———–
तड़प रहा है सुमन आज फिर ,जन-जन की आजादी को,
संदेश दे रहामहा बलिदानी वह, एक नई जन- क्रांति को ।
मध्य हिमालय के ———-

कवि का परिचय
सोमवारी लाल सकलानी, निशांत ।
सुमन कॉलोनी चंबा, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड।

Bhanu Prakash

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।