आज़ाद देश में भूख की न स्याह रात हो। पेट से न मुलाक़ात हो। ग़रीबों की बस्ती में अब भूख...
साहित्य जगत
तो जानूं ग़रीबों के आंसू पी लें, तो जानूं। ग़रीब आज सुख से जी लें, तो जानूं। उनकी राहों में...
मुहब्बत जीत गई। नफ़रत हार गई। प्रेम का सोत कभी सूख नहीं सकता। बरसने से नेह कभी रूक नहीं सकता।...
मनभावन सावन है। मौसम भी पावन है। मैली धरती का भी अब उजला दामन है। कृष्ण - भक्ति में डूबा...
बादल बादल मनमानी पर उतरे। वर्षों हो गए , ये न सुधरे। दिन सुहावने सावन के वे हो गए अब...
हाथों में हथकड़ियां हैं। पांवों में बेड़ियां हैं। कैसे हम लाज बचाएं घर-घर छुपा भेड़िया है। घरों में जो मिलती...
आज़कल झूठ ने रफ़्तार पकड़ी हो रहा है मन विकल। घुटनों के बल ही रेंगता सच देख लो अब आजकल।।...
नदियां नदियां चलकर घर तक आईं। घर भी डरकर कांपे थर - थर। माटी के घर हैं जो जर्जर। आफ़त...
बीवी मायके गयी है आज हो बीवी मायके गयी है आज। सुनो जी मायके गयी है आज।। सच कहता हूं...
बुरा मान गए ज़रा आईना क्या दिखाया, बुरा मान गए। ज़रा चुनाव में क्या हराया, बुरा मान गए। चाहते तो...
