रहते हैं हम डरे - डरे से। ज़िंदा रहकर मरे - मरे से। हरे - भरे थे जो खेत कभी...
साहित्य जगत
हम कहें, तुम सुनो; तुम कहो, हम सुनें आओ! बैठो बातों का स्वेटर बुने। उम्र का छौना भागा जा रहा...
एक - एक वोट को आसमां से गिर वे, खजूर में अटक रहे हैं। एक - एक वोट को जो,...
देख तमाशा हँसता है सच खाना-दाना ढूँढ रहा सच, कलयुग की खलिहानों पर। देख तमाशा हँसता है सच, दो दिन...
घर के बिना झूठ हमसे कहा नहीं जाता। सत्य उनसे सहा नहीं जाता। भले हमारे ख़िलाफ़ हो हवा उसके संग...
गांव नहीं छूटा हमसे आज भी गांव नहीं छूटा। जिस गांव में हमने देखे सपने। उन्हें सच किया वो ग़ैर...
मानव धर्म शिखा मैं हिन्दू हूं वह मुस्लिम है, यह दृष्टि बदल डालो। मानव हो तो मानवता का, दुःख दर्द...
शुक्रवार को देहरादून स्थित एनआईवीएच सभागार में सेव हिमालय मूवमेंट और संवेदना की ओर से आयोजित विद्यासागर सम्मान समारोह में...
गालीबाज संसद शर्मसार हो गई। प्रतिष्ठा तार- तार हो गई। लोकतंत्र की थी जो गरिमा बद होकर बाज़ार हो गई।...
बचपन अपना बचपन बचाके रखना। भूल न जाना बचपन के खेल। पल में झगड़ना पल में मेल। गुड्डा - गुड़िया...
