अशोक आनन की कविता- मिला न कोई साया
ज़िन्दगी की धूप में
मिला न कोई साया।
तपते रहे दुपहर में
खपरैलों की तरह।
उधड़ते रहे फफोले
थिगड़ैलों की तरह।
चलते रहे उम्र भर
मकाम न कोई आया।
आसमां तले गीत की
सजती रही महफ़िल।
हवाओं में प्यार की
बुझती रही कंदील।
दर्द जहां सोया था
गीत वहीं गुनगुनाया। (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
ठूंठ छोड़ पखेरू भी
जा, कहीं दुबक गए।
नीड़ उनके, सहर में
अलावों से जल गए।
गुंजन उनका भोर के
दिल को ज़रा न भाया।
ज़िन्दगी का हाथ थामे
चल रहे भीड़ में।
दूर्वाएं दिखें न हरी
घास की बीड़ में।
ज़ुल्म यहां दिल पर
सांसों तक ने बरपाया।
कवि का परिचय
अशोक आनन, जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com
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