Video: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी-पुलिस अफसरों और सत्ताधारी दलों का गठजोड़ चिंता का सबब, उत्तराखंड में भी दिखा ऐसा, आप हुई हमलावार
तीन दिन पहले देश के सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि पुलिस अफसरों और सत्ताधारी दलों का गठजोड़ चिंता का सबब है। इस खबर पर हम विस्तार से नहीं जाएंगे और खबर के अंत में इसका लिंक दे देंगे, ताकि आप पढ़ सकोगे कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा। अब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज की एक कार्यक्रम में की गई टिप्पणी एक दिन पहले सामने आई। इसमें कहा गया कि सरकारों के झूठ को बुद्धिजीवियों को उजागर करना चाहिए। आपकी सुविधा के लिए इस खबर का लिंक भी नीचे दिया जा रहा है। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की ऐसी सख्त टिप्पणियों से ये तो साफ है कि देश में इस समय कुछ भी सही नहीं घट रहा है। चाहे वो भाजपा शासित राज्य सरकारें हों या फिर कांग्रेस और दूसरे दलों की। हर जगह कानून से खिलवाड़ किया जा रहा है। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पुलिस और सत्ताधारी दलों के गठजोड़ का नमूना उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी और सत्ताधारी दल भाजपा के बीच छिड़े पोस्टर वार से देखा जा सकता है।
सत्ताधारी दलों के लिए विशेष छूट
यूं तो सत्ताधारी दल के नेताओं के लिए कानूनों का उल्लंघन माफ होता है। कोरोनाकाल में हम ये अच्छी तरह देख चुके हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भीड़ जुटाई तो मुकदमे हुए। आम नागरिकों के खिलाफ मास्क और शारीरिक दूरी को लेकर मुकदमे हुए। वहीं, सत्ताधारी दलों के नेता, मंत्रियों ने भीड़ जुटाई, मास्क नहीं लगाए, लेकिन कहीं किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अभी भी कई कार्यक्रमों की ऐसी तस्वीरें आ रही हैं, जिसमें सत्ताधारी दलों के नेता, मंत्री, विपक्षी दलों के लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं और ना ही कोरोना नियमों का पालन कर रहे हैं।

राजनीतिक दलों का अभियान
उत्तराखंड में इन दिनों प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही सरकार के खिलाफ हमलावर है। कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस लाने की जुगत में है, वहीं, आप यहां राजनीतिक जमीन को तलाशने और उस पर कायम होने की हर संभव कोशिश में है। आम आदमी पार्टी ने तो सरकार के नाक में दम किया हुआ है। वह ऐसे मुद्दे उछाल रही है कि कांग्रेस और भाजपा को भी उस मुद्दों पर कूदना पड़ रहा है। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में आप की सरकार बनने पर 300 यूनिट फ्री बिजली, प्रदेशभर में किसी भी जिले में बिजली कटौती नहीं करने, काश्तकारों को मुफ्त में बिजली, पुरानें बिलों से बकाया भी माफ करने की घोषणा की थी। इसे लेकर जगह जगह पोस्टर लगा दिए गए थे।

ये है पोस्टर वार
हाल ही में उत्तराखंड पुलिस की ओर से आम आदमी पार्टी के लोगों के खिलाफ मसूरी, देहरादून और हरिद्वार के कई थानों में मुकदमें दर्ज किए गए। इसमें कहा गया कि बिजली के खंभों में इस दल के लोगों के पोस्टर लगाए गए हैं। ऊर्जा निगम ने शिकायत की है कि पोस्टर, बैनर, होर्डिंग से बिजली की आपूर्ति बाधित हो रही है। इस मामले में देहरादून से तीन और हरिद्वार जिले में एक गिरफ्तारी की गई। नियम तो नियम हैं। सरकारी संपत्ति, बिजली के खंभों पर पोस्टर लगाना गलत है। ऐसे में इस कार्रवाई का कोई विरोध नहीं करेगा।

सत्ता और पुलिस का गठजोड़
अब इसे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के नजरिये से देखा जाए तो यही कहा जाएगा कि तो उत्तराखंड में भी पुलिस अफसरों और सत्ताधारी दलों का गठजोड़ है। ये पोस्टरों को देख कर साफ हो जाएगा। जिन बिजली के खंभों पर आम आदमी पार्टी के पोस्टरों से ऊर्जा निगम की बिजली आपूर्ति बाधित हो रही थी, उन पर अब सीएम पुष्कर सिंह धामी और पीएम नरेंद्र मोदी के पोस्टर लगा दिए गए हैं। अब सवाल उठता है कि यहां क्या नियमों में बदलाव किया गया है। क्या इन पोस्टरों से कोई खतरा नहीं है। आप वीडियो में भी देख सकते हैं कि कैसे खंभों में चढ़कर पोस्टर लगाए जा रहे हैं। ये वीडियो आम आदमी पार्टी की ओर से ही जारी किया गया है।
सीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने पहुंचे आप कार्यकर्ता, पुलिस ने नहीं लिखी तहरीर
अब जहां से आप के पोस्टर हटाए गए और वहां सीएम के पोस्टर लगाए जा रहे हैं, इसे लेकर आप भी हमलावर हो गई है। शनिवार की देर शाम आप उपाध्यक्ष रजिया बेग के नेतृत्व में कार्यकर्ता नेहरू कॉलोनी थाने पहुंचे और उन्हीं धाराओं में सीएम के खिलाफ तहरीर लिखने का अनुरोध किया, जिन धाराओं में आप कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमें किए गए। वहीं, आज डोईवाला में आप प्रवक्ता राजू मौर्य ने सीएम के पोस्टर उन्हीं बिजली के पोल पर लगाने पर सवाल उठाए और कहा सरकार जानबूझ कर ऐसे मुकदमें आप पार्टी पर कर रही है।

आप उपाध्यक्ष रजिया बेग ने कहा,सरकार के दिशा निर्देश पर आप कार्यकर्ताओं पर फर्जी कार्यवाही की जा रही और अगर सरकार और बीजेपी के लोग वही काम कर रहे हैं। उनके खिलाफ शिकायत नहीं ली जा रही है। अब पार्टी इस मुद्दे को लेकर कोर्ट जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझ कर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर मुकदमें कर उनको परेशान करने का काम कर रही है।
आप कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस अपराध में उनके खिलाफ मुकदमें दर्ज किए गए, यदि वही अपराध सत्ताधारी दल करे तो मुकदमा उनके खिलाफ भी होना चाहिए। नेहरू कॉलोनी थाने में काफी इंतजार के बाद भी पुलिस ने तहरीर लिखने से इनकार कर दिया। यानी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी यूं ही नहीं है।
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