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February 1, 2026

राजस्थान भाजपा में खींचतान, बीजेपी कार्यालय के सामने से हटाए वसुंधरा के पोस्टर, बोलीं-पोस्टर नहीं, लोगो के दिलों में करती हैं राज

बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पार्टी में भूमिका को लेकर पिछले कुछ महीनों से खींचतान नजर आ रही है।

राजस्थान में भाजपा के दो खेमों के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सक्रिय हुई तो उनका विरोधी धड़ा भी आक्रमक हो गया है। बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पार्टी में भूमिका को लेकर पिछले कुछ महीनों से खींचतान नजर आ रही है। कुछ समय पहले राजे के समर्थक रोहिताश शर्मा ने बयान दिया था कि राजस्थान में वसुंधरा राजे के कद का कोई नेता नहीं है। इसके बाद पार्टी ने सस्पेंड कर दिया था। अब बीजेपी दफ्तर के सामने से उनका पोस्टर हटा दिया गया है। हालांकि, राजे ने साफ किया कि वो पोस्टर की राजनीति नहीं, बल्कि लोगों के दिलों पर राज करने की राजनीति करती हैं।
राजस्थान के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा करने अपने गृह जिले झालावाड़ पहुँची वसुंधरा राजे ने शहर के डाक बंगले में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता से भी मुलाकात की। इस दौरान उनकी समस्याएं सुनी। वसुंधरा राजे से मिलने के लिए डाक बंगले में सुबह से ही लोग जमा होने शुरू हो गए थे। जिले के दूरदराज इलाकों से भी बीजेपी कार्यकर्ता वसुंधरा राजे से मिलने पहुंचे थे।
इस दौरान वसुंधरा राजे ने पोस्टर विवाद पर कहा कि-मैं पोस्टर की राजनीति में कभी विश्वास नहीं करती। अपने 30 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने हमेशा लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश की है। मेरी मां राजमाता सिंधिया ने भी शुरू से मुझे यही सिखाया है कि लोगों के दुख दर्द बांट कर उन्हें अपने गले से लगाओ और उनके दिलों में जगह बनाओ। जब लोगों के दिलों में जगह बन जाती है तो वहीं से राजनीति होती है। राजे ने कहा पॉलिटिक्स ही सबकुछ नही होती, जब आप लोगों को गले से लगाते हैं तो राजनीति शुरू हो जाती है।
बता दें कि इसी साल मार्च में वसुंधरा राजे ने अपने जन्म दिवस पर भी भरतपुर इलाक़े में एक यात्रा की थी। कई लोगों ने इसे एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा था। इसमें वसुंधरा समर्थक ही नजर आए थे। उस वक्त राजे ने इसे शक्ति नहीं, बल्कि भक्ति प्रदर्शन का नाम दिया था। इस बार फिर राजे के समर्थक नेता और कार्यकर्ता फिर से जुटे हैं।

 

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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