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August 1, 2026

एसआईआरः काम छोड़कर लाइन में लगो, पिता बेटे को क्लीन चिट, पत्नी और दूसरे बेटे को नोटिस, कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों से उत्तराखंड में मतदादा सूची को लेकर चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही अब मतदाताओं को एसआईआर की मैपिंग संबंधी विवरण सही से नहीं भरने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ये नोटिस बीएलओ के माध्यम से दिए जा रहे हैं। नोटिस में बताया गया है कि किस तिथि को नोटिस का जवाब देने के लिए सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना है। बात यहां तक तो ठीक है, लेकिन नोटिस को लेकर कई परिवार के लोगों का असहज होना लाजमी है। क्योंकि सारे कामधाम छोड़कर, नौकरी पेशा वाले, या दिहाड़ी करने वाले अवकाश लेकर लाइन में खड़े होंगे। इसमें भी खास बात ये है कि एक ही परिवार के लोगों को अलग अलग दिन नोटिस का जवाब देने की तिथि तय की गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नोटिस का उदाहरण
एक उदाहरण मैं अपना ही दे रहा हूं। मैने एसआईआर के चार फार्म भरे। उसमें अपना खुद का, पत्नी का, दो बेटों का। इनमें मैरे और छोटे बेटे को तो नोटिस नहीं मिला। यानि हम दोनों को क्लीन चिट दे दी गई। या फिर हो सकता है कि हम दोनों के नोटिस बाद में आएं। आने कहां हैं। बीएलओ तो घर घर जाकर नोटिस नहीं दे रहे हैं। मोहल्ले के किसी मंदिर या स्कूल में बैठकर मतदाता को फोन कर बुला रहे हैं। अब इसमें ये भी दिक्कत है कि किसी परिवार में यदि सारे सदस्य नौकरी पेशा वाले हैं, तो अचानक दोपहर पर फोन आने पर नोटिस लेने के लिए वे कैसे बीएलओ के पास जा पाएंगे। दूसरा ये है कि बेटे के नोटिस में पिता के नाम पर पिछली एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से अंतर बताया गया। उसे नोटिस का जवाब देने के लिए तीन अगस्त को बुलाया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वहीं, पत्नी के नाम पर दिए गए नोटिस में जवाब देने की तारीख छह अगस्त है। इस नोटिस में दो कारण भी स्पस्ट नहीं है। इसमें पिछले एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से कोई मैपिंग ना होने और गलत मैपिंग की आशंका जताई गई है। ऐसे में एक ही परिवार के दो सदस्यों को अलग अलग दिन नोटिस का जवाब देने के लिए लाइन पर खड़ा होना पड़ेगा। इसी तरह मेरे बड़े भाई और उसके बेटे को भी नोटिस भेजा गया है।  (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अब सवाल ये है कि यदि कोई दिहाड़ी मजदूर कामकाज के समय लाइन में खड़ा रहेगा तो वह परिवार के लिए रोटी का जुगाड़ कैसे करेगा। पहले घर घर जाकर मतदाता सूची तैयार करने का काम होता था, अब इस व्यवस्था को क्यों बंद कर दिया। इसका जवाब पाठक ही दे सकते हैं कि इसके पीछे मंशा क्या है। वैसे विपक्षी राजनीतिक दल आरोप लगाते रहे हैं कि इसके पीछे मंशा साफ दिखती है कि मतदाता सूची से अधिक से अधिक लोगों को बाहर किया जाए। सरकार के  पेपर लैस, आनलाइन वाले दावे भी ढकोसला निकले। फार्म भी कागज पर भरे जा रहे हैं। नोटिस भी कागज पर ही दिया जा रहा है। इसका जवाब भी आनलाइन के बजाय खुद उपस्थित होकर देना होगा।   (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तराखंड कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत के नेतृत्व मे मुख्य निर्वाचन अधिकारी से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया की खामियों के सम्बन्ध में ज्ञापन दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ वीवीआरसी पुरूषोत्तम को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के प्रथम चरण की त्रुटियों एवं द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के लिए अपनाई जा रही अव्यावहारिक एवं पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया के संबंध में कांग्रेस पार्टी की आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रथम चरण की प्रक्रिया के दौरान अनेक गंभीर त्रुटियां एवं अनियमितताएं सामने आई हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रथम चरण में सामने आई इन कमियों एवं त्रुटियों का समुचित परीक्षण एवं निराकरण किए बिना द्वितीय चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना न केवल मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करेगा, बल्कि संपूर्ण पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगा। कहा गया कि कांग्रेस पार्टी राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा अपनाई जा रही व्यवस्था के कई बिन्दुओं पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज करती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये दिए गए तर्क
1. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत प्राप्त आपत्तियों एवं दावों की सुनवाई के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा अनेक स्थानों पर एक ही समय में दो अलग-अलग मतदान केन्द्रों पर एक ही सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ)/निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ड्यूटी निर्धारित की गई है, जो कि तर्क संगत प्रतीत नहीं होती है।
2. निर्वाचन विभाग द्वारा अपनाई जा रही यह व्यवस्था विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तरह अव्यावहारिक है। पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, लंबी दूरी, सीमित परिवहन सुविधाओं तथा कठिन आवागमन के कारण किसी भी अधिकारी के लिए एक ही समय अथवा दो घंटे के अंतराल पर दो अलग-अलग स्थानों पर उपस्थित होकर सुनवाई करना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। इससे सुनवाई प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ-साथ मतदाताओं को अनावश्यक असुविधा का सामना करना पड़ेगा तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन होने की आशंका है।
3. यदि निर्धारित समय पर अधिकारी किसी एक मतदान केन्द्र पर उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो संबंधित मतदाताओं के दावे एवं आपत्तियों के निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण का अधिकार प्रभावित होगा। इससे निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

4. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के अंतर्गत की गई मैपिंग में भी अनेक तर्कहीन एवं गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर मतदान क्षेत्रों, मतदान केन्द्रों एवं मतदाताओं की मैपिंग इस प्रकार की गई है, जो तार्किकता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है। उदाहरण स्वरूप विधानसभा क्षेत्र चकराता के मतदान केन्द्र 42-फनार में विसंगत मतदाताओं की कुल संख्या 19 दर्शाई गई है, जबकि अपमैप की संख्या 398 अर्थात कुल 415 विसंगतियां दर्शाई गई हैं। इसी प्रकार मतदान केन्द्र 110-खबऊ में विसंगत मतदाताओं की कुल संख्या 2 दर्शाई गई है, जबकि अपमैप की संख्या 371 अर्थात कुल 373 विसंगतियां दर्शाई गई हैं, जो कि तर्क संगत प्रतीत नहीं होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

5. उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण मतदान केन्द्रों पर स्थानीय एवं स्थायी निवासियों के नामों पर बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार की आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। यह अत्यंत आश्चर्यजनक एवं तर्कहीन है, क्योंकि इन दूरस्थ पर्वतीय गांवों में बाहरी व्यक्तियों के निवास अथवा मतदाता के रूप में शामिल होने की संभावना लगभग नगण्य है। अधिकांश ग्रामीण परिवार पीढ़ियों से अपने मूल गांवों में निवासरत हैं तथा उनकी पहचान एवं निवास की स्थिति स्थानीय प्रशासन एवं ग्राम समुदाय के लिए सर्वविदित है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मतदाताओं को अनावश्यक रूप से किया जा रहा परेशान
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय मतदाताओं के नामों पर बिना ठोस एवं प्रथमदृष्टया प्रमाण के आपत्तियां दर्ज किया जाना न केवल मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाला है, बल्कि एसआईआर की प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस प्रकार की निराधार आपत्तियों के कारण ग्रामीण मतदाताओं को बार-बार सुनवाई के लिए उपस्थित होना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय, धन एवं श्रम की अनावश्यक हानि उठानी पड़ रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आपत्तियों को किया जाए निरस्त
कांग्रेस पार्टी का आग्रह है कि स्थानीय एवं स्थायी निवासियों के विरुद्ध दर्ज की गई निराधार एवं सामूहिक आपत्तियों की गहन जांच कर उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए तथा भविष्य में बिना पर्याप्त साक्ष्य के इस प्रकार की आपत्तियां स्वीकार न की जाएं, ताकि वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अधिकारी और कर्मचारियों में भी पूर्ण जानकारी का अभाव
ज्ञपान में कहा गया कि यह भी अत्यंत चिंताजनक है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में नियुक्त अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी स्वयं प्रक्रिया के संबंध में पूर्ण जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं। अनेक स्थानों पर मतदाताओं, बूथ स्तरीय अभिकर्ताओं (बीएलए) एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों अथवा सुनवाई संबंधी नियमों के बारे में जानकारी मांगे जाने पर संबंधित कार्मिकों ने स्पष्ट रूप से यह कहा कि उन्हें प्रक्रिया की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है अथवा उन्हें इस संबंध में पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ऐसी स्थिति निर्वाचन जैसी संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यदि प्रक्रिया का क्रियान्वयन करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी ही निर्धारित नियमों एवं दिशा-निर्देशों से पूर्णतः अवगत नहीं हैं, तो इससे मतदाताओं को भ्रमित होने, अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करने तथा विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीके से प्रक्रिया अपनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस पार्टी की निर्वाचन आयोग से मांग
1. प्रथम चरण की सभी शिकायतों, त्रुटियों एवं अनियमितताओं की निष्पक्ष समीक्षा कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा उसके उपरांत ही द्वितीय चरण की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। ताकि किसी भी पात्र मतदाता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन न हो।
2. एक ही समय में दो मतदान केन्द्रों पर एक ही एईआरओ/ईआरओ की नियुक्ति संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं।
3. प्रत्येक मतदान केन्द्र के लिए पृथक-पृथक एईआरओ/ईआरओ अथवा सक्षम अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
4. पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक एवं परिवहन संबंधी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सुनवाई की तिथि एवं समय का पुनर्निर्धारण किया जाए।
5. सभी राजनीतिक दलों एवं मतदाताओं को समान अवसर प्रदान करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सुविधाजनक सुनवाई प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
6. एसआईआर प्रक्रिया में तैनात सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान कर स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी प्रक्रिया से संबंधित सभी नियमों एवं प्रावधानों की पूर्ण जानकारी रखते हुए ही अपने दायित्वों का निर्वहन करे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस प्रतिनिधमंडल ने कहा कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष, पारदर्शी एवं मतदाता हितैषी निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए इस गंभीर विषय पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करेगा, ऐसी हम अपेक्षा करते हैं।
प्रतिनिधमंडल में शामिल लोग
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, पूर्व विधायक राजकुमार, पूर्व मंत्री अजय सिंह, प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह, देहरादून महानगर अध्यक्ष डॉ जसविन्दर सिंह गोगी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा, यशपाल चौहान, विनोद चौहान, विजय चौहान, भरत शर्मा, शरीफ अहमद बेग, सुमित खन्ना, भूपेन्द्र नेगी, प्रियांश छाबड़ा, विकास नेगी आदि शामिल थे।
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