हिम्स जौलीग्रांट में प्रशिक्षणः प्रतिभागियों ने सीखे नैतिक शोध और क्लीनिकल रिसर्च के महत्वपूर्ण पहलू
देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के क्लीनिकल रिसर्च विभाग की ओर से आयोजित हेल्थकेयर में गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस एवं मेडिकल एथिक्स विषय पर पांच सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बीसी रॉय सभागार में आयोजित समापन समारोह में हिम्स के डीन डॉ. अहमदुल्ला शरीफ ने कहा कि गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस, चिकित्सा नैतिकता और वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा विश्वसनीय शोध की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का भी पालन करना चाहिए। ऐसे प्रशिक्षण जिम्मेदार और ईमानदार शोध संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसआरएचयू के महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेंद्र चौहान ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण में गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस और मेडिकल एथिक्स के साथ आध्यात्मिकता, आत्म-जागरूकता और मानवीय मूल्यों को भी शामिल किया गया, जिससे प्रतिभागियों का समग्र विकास संभव हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम की प्रधान अन्वेषक डॉ. निक्कू यादव ने बताया कि पांच सप्ताह तक चले इस प्रशिक्षण में 32 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान 51 विशेषज्ञ व्याख्यान और 16 प्रायोगिक सत्र आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को क्लीनिकल ट्रायल, शोध नैतिकता, वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा तथा आधुनिक क्लीनिकल रिसर्च की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
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