प्रशांत महासागर ज्यादा गर्म, सुपर अल नीनो के कहर की संभावना, कहीं सूखा तो कहीं आएगी बाढ़
भारत में मई माह के पहले पखवाड़े तक अधिकांश राज्यों में गर्मी से राहत रही। अब आने वाले दिनों में लोगों की मुसीबत बढ़ने वाली है। किसानों के लिए भी खतरे की घंटी की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि भारत और पूरी दुनिया के लिए 2026 का साल बेहद चिंता बढ़ाने वाला है। कहीं रिकॉर्ड गर्मी तो कहीं कमजोर मानसून की स्थिति रहेगी। ऐसे में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल सकती हैं। इस जलजले का कारण सुपर अलनीनो होगा। वहीं, प्रशांत महासागर जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है। इसे लेकर राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने एक नया पूर्वानुमान जारी किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस दौरान होगा ज्यादा सक्रिय
पूर्वानुमान में कहा गया है कि अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 तक ‘सुपर’ अलनीनो की सबसे अधिक संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही अलनीनो से मानसूनी बारिश कम होने की चिंता जता चुका है। जलवायु परिवर्तन को लेकर एक नई चेतावनी की चर्चा दुनिया भर के मौसम विज्ञान से जुड़े हलकों में लगातार हो रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अभी बन रहा अल नीनो अगले कुछ महीनों के भीतर बेहद मजबूत हो जाएगा। इस बात की संभावना है कि यह अब तक का सबसे मजबूत अल नीनो होगा। इस तरह के घटनाक्रम से दुनिया भर में अभूतपूर्व लू और जलवायु संबंधी गड़बड़ियों की आशंका बढ़ गई है। अपेक्षा से कहीं ज्यादा जल्दी और तेजी से तापमान बढ़ने के संकेतों के बीच, समुद्र की सतह पर की जा रही निगरानी को और तेज कर दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डरा रहे हैं अलनीनो के बारे में नए पूर्वानुमान
14 मई को प्रकाशित एक नए ENSO पूर्वानुमान में NOAA का अनुमान है कि आगामी अलनीनो के अक्टूबर से शुरू होने पर मजबूत या बहुत मजबूत श्रेणी में आने की 65% संभावना है, जो इसे रिकॉर्ड किए गए इतिहास में सबसे मजबूत अलनीनो में से एक बना सकता है। अक्टूबर से फरवरी की अवधि के लिए अत्यंत शक्तिशाली अलनीनो यानी समुद्र की सतह के तापमान में 3.6 डिग्री फारेनहाइट (2 डिग्री सेल्सियस) की बढ़ोतरी, जिसे अनौपचारिक रूप से सुपर अलनीनो कहा जाता है। कुछ एक्सपर्ट तो इसे राक्षस तक कहते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
2026 के आखिर तक और मजबूत हो जाएगा अल-नीनो
अमेरिका मौसम एजेंसी नोआ और ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी जैसे मौसम पूर्वानुमान केंद्र, इस स्थिति पर लगातार बारीकी से नजर रखे हुए हैं। वहीं, बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस बात के बढ़ते प्रमाण मिल रहे हैं कि अल नीनो की स्थितियां जल्द ही उभर सकती हैं और 2026 के आखिर तक इनके और ज्यादा मजबूत होने की संभावना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मई से लेकर जुलाई के बीच आएगा सुपर अलनीनो
वहीं, इस बात की भी 82 फीसदी संभावना है कि अलनीनो मई माह से जुलाई के बीच आ जाएगा और यह चरण फरवरी 2027 तक जारी रहने की प्रबल संभावना है। यह NOAA के अप्रैल के पूर्वानुमान की तुलना में निश्चितता में लगभग 20 प्रतिशत अंकों की वृद्धि है। इसमें कहा गया था कि अल नीनो निकट ही आने वाला है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सुपर अलनीनो से पूरी दुनिया में मचती है तबाही
अलनीनो की घटनाएं हर दो से सात वर्षों में होती हैं, जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में हवा और समुद्री धाराओं के पैटर्न में बदलाव के कारण समुद्र की सतह का तापमान ऐतिहासिक औसत से 0.9 फ़ारेनहाइट (0.5 डिग्री सेल्सियस) अधिक हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ता है। दुनिया तेजी से तटस्थ अवस्था से बाहर निकल रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अलनीनो से बढ़ रहा दुनिया का तापमान
अलनीनो प्राकृतिक अलनीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) जलवायु चक्र का गर्म चरण है, जो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के जल में एक से ज्यादा बार होने वाला मौसमी बदलाव है, जो पूरी दुनिया के तापमान को बेहद बढ़ा देता है, जिससे विश्व भर में मौसम के पैटर्न और फसलों पर प्रभाव पड़ता है। यदि सुपर अलनीनो आता है, तो यह अब तक के सबसे शक्तिशाली अलनीनो के बराबर हो सकता है। 1877 का वह विनाशकारी अलनीनो जिसने 1876 से 1878 तक वैश्विक अकाल को जन्म दिया था। इस अकाल में 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जो उस समय विश्व की जनसंख्या का 3% था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
2023-24 को अलनीनो ने बनाया सबसे गर्म साल
दुनिया का सबसे हालिया अलनीनो मई 2023 से मार्च 2024 तक चला और 2024 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनाने के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार था। क्लाइमेट ब्रीफ के 21 अप्रैल को प्रकाशित जलवायु आकलन के अनुसार, यदि आगामी अलनीनो शक्तिशाली या अत्यंत शक्तिशाली होता है, तो 2027 पिछले रिकॉर्ड को पार कर सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब अपना ही रिकॉर्ड तोड़ सकता है अलनीनो
दरअसल, आने वाला अलनीनो खुद ही रिकॉर्ड तोड़ सकता है। अल्बानी विश्वविद्यालय में वायुमंडलीय और पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर पॉल राउंडी ने 5 मई को X पर लिखा-1870 के दशक के बाद से सबसे बड़े अल नीनो की संभावना को लेकर विश्वास स्पष्ट रूप से बढ़ रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भारतीय मौसम विभाग की चिंता
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई, 2026 के आसपास जल्दी आगमन का आधिकारिक पूर्वानुमान लगाया है। यह सामान्य आगमन तिथि 1 जून से पहले है और 2025 सहित हाल के समय में मानसून के जल्दी आगमन की प्रवृत्ति को जारी रखता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के नवीनतम ईएनएसओ पूर्वानुमान के अनुसार, अलनीनो के जल्द ही विकसित होने और 2026-27 की उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक जारी रहने की संभावना है। एक मौसम एक्सपर्ट और क्लाइमेट इमरजेंसी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर पीटर डी कार्टर ने कहा है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से धरती का तापमान 2024 के रिकॉर्ड को छूने के बेहद करीब है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अलनीनो के चलते IMD की आशंका
अप्रैल 2026 में जारी IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में मानसून की वर्षा को दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के लगभग 92% रहने का अनुमान लगाया गया था, जिसे सामान्य से कम माना गया। पूर्वानुमान में यह भी बताया गया कि
कम वर्षा वाले मानसून (एलपीए के 90% से कम) की लगभग 35% संभावना है। वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में वर्षा की कमी का अधिक जोखिम है। इससे संकेत मिलता है कि मानसून की शुरुआत जल्दी होने के बावजूद, यदि मानसून के मुख्य महीनों के दौरान अलनीनो मजबूत होता है, तो समग्र मौसमी प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


