कटते जंगल, टूटती बारिश, कमजोर पड़ रहे अमेज़न के फेफड़े
अमेज़न के जंगल को अक्सर धरती के फेफड़े कहा जाता है। अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि ये फेफड़े सिर्फ कमजोर नहीं हो रहे, बल्कि एक ऐसे मोड़ के करीब पहुंच रहे हैं, जहां से वापसी मुश्किल हो सकती है। जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी “Deforestation-induced drying lowers Amazon climate threshold” के मुताबिक अगर अमेज़न में जंगल कटाई मौजूदा रफ्तार से बढ़ती रही, तो सिर्फ 1.5 से 1.9 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान वृद्धि पर ही अमेज़न का बड़ा हिस्सा घने वर्षावन से सूखे, बिखरे और सवाना जैसे परिदृश्य में बदल सकता है। यह अध्ययन (PIK) के वैज्ञानिकों ने किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी तक दुनिया मानती रही कि अमेज़न को इस तरह के बड़े बदलाव तक पहुंचने के लिए लगभग 3.7 से 4 डिग्री तक की गर्मी चाहिए होगी। नई रिसर्च कहती है कि जंगल कटाई इस सीमा को खतरनाक रूप से नीचे ला रही है। अमेज़न में आज तक लगभग 17 से 18 प्रतिशत जंगल खत्म हो चुका है। यानी यह सिस्टम पहले ही उस “खतरे वाले दायरे” के काफी करीब पहुंच चुका है जिसकी ओर वैज्ञानिक वर्षों से इशारा कर रहे थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
स्टडी के प्रमुख लेखक और PIK वैज्ञानिक कहते हैं कि जंगल कटाई अमेज़न को हमारी सोच से कहीं ज्यादा कमज़ोर बना रही है। इससे वातावरण सूखता है और जंगल की अपनी बारिश पैदा करने की क्षमता कमजोर होती है। फिर मामूली अतिरिक्त गर्मी भी पूरे सिस्टम में एक के बाद एक असर पैदा कर सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दरअसल अमेज़न सिर्फ बारिश पर निर्भर जंगल नहीं है। वह खुद भी बारिश बनाता है। पेड़ अपनी पत्तियों से बड़ी मात्रा में जलवाष्प हवा में छोड़ते हैं। वहीं नमी बाद में बादल बनकर फिर अमेज़न पर बरसती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अमेज़न की लगभग आधी बारिश इसी “moisture recycling” से आती है। जब जंगल कटते हैं, तो यह प्राकृतिक जलचक्र टूटने लगता है। यानी एक इलाके में कटे पेड़ सिर्फ वहीं असर नहीं डालते। उनकी वजह से सैकड़ों और हजारों किलोमीटर दूर दूसरे हिस्सों में भी सूखा बढ़ सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
स्टडी के सह-लेखक और के वैज्ञानिक कहते हैं कि जब अमेज़न के एक हिस्से में जंगल कटाई नमी के प्रवाह को रोकती है, तो दूर के इलाकों की भी resilience कमजोर होने लगती है। सूखे का असर पूरे नेटवर्क में फैलता है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सिर्फ तापमान नहीं देखा। उन्होंने climate projections, hydrological modelling और atmospheric moisture transport network को जोड़कर यह समझने की कोशिश की कि अमेज़न एक interconnected सिस्टम की तरह कैसे काम करता है। इसके लिए अरबों moisture parcels के कंप्यूटर simulations किए गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रिसर्च यह भी चेतावनी देती है कि अगर अमेज़न बड़े पैमाने पर degrade हुआ, तो असर सिर्फ दक्षिण अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ब्राज़ील, बोलिविया, पराग्वे और अर्जेंटीना जैसे कृषि क्षेत्रों में बारिश और जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। PIK के निदेशक और अध्ययन के सह-लेखक कहते हैं कि अमेज़न अब तक धरती के climate system को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता आया है, लेकिन लगातार जंगल कटाई इसे tipping point के करीब धकेल रही है। इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
फिर भी वैज्ञानिक पूरी तरह निराश नहीं हैं। स्टडी कहती है कि अगर तेजी से जंगल कटाई रोकी जाए, degraded forests को restore किया जाए और वैश्विक emissions कम किए जाएं, तो जोखिम अभी भी घटाया जा सकता है। ब्राज़ील सरकार की तरफ से “Arc of Restoration” के तहत करीब 1.2 करोड़ हेक्टेयर जंगल बहाल करने की योजना को वैज्ञानिक महत्वपूर्ण मानते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब सवाल सिर्फ अमेज़न का नहीं है। यह उस सोच का सवाल है जिसमें जंगल को सिर्फ जमीन, लकड़ी या खनिज का स्रोत समझा गया। यह रिसर्च याद दिलाती है कि जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं होते। वे बारिश बनाते हैं, तापमान संभालते हैं, नदियों को जिंदा रखते हैं, और कई बार पूरे महाद्वीपों की सांसों का संतुलन तय करते हैं। जब वे टूटते हैं, तो सिर्फ हरियाली नहीं जाती। मौसम की भाषा बदलने लगती है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


