84 फीसद भारतीयों का तर्क, महसूस कर रहे हैं ग्लोबल वार्मिंग
गर्मी पहले भी होती थी, लेकिन उसे आसानी से सहन किया जाता रहा है। अब गर्मी सिर्फ मौसम नहीं रही। वह बातचीत का हिस्सा बन चुकी है। गांव के चौपाल से लेकर शहर के दफ्तर तक, लोग अब सिर्फ यह नहीं कह रहे कि गर्मी बढ़ गई है। वे यह भी कह रहे हैं कि मौसम पहले जैसा नहीं रहा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नए सर्वेक्षण में सामने आई ये जानकारी
येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सी-वोटर इंटरनेशनल के नए सर्वेक्षण “क्लाइमेट चेंज इन द इंडियन माइंड” से पता चलता है कि भारत में जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की या अमूर्त समस्या नहीं रह गई है। अधिकांश भारतीय इसे अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक 84 प्रतिशत भारतीयों का कहना है कि उन्होंने खुद ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को महसूस किया है। वहीं चार में से तीन भारतीय अपने समुदाय को प्रभावित करने वाली भीषण लू को लेकर चिंतित हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डराने वाले हैं आंकड़े
यह सिर्फ एक राय नहीं है। पिछले तीन दशकों में भारत ने चक्रवात, बाढ़ और भीषण लू समेत 430 चरम मौसम घटनाओं का सामना किया है। इन घटनाओं में लगभग 80,000 लोगों की मौत हुई और करीब 170 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। यही वजह है कि जलवायु परिवर्तन अब लोगों के लिए वैज्ञानिक रिपोर्टों का विषय भर नहीं रह गया। वह उनके अनुभव का हिस्सा बन चुका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
स्वच्छ ऊर्जा की मिला संकेत
सर्वेक्षण में एक और महत्वपूर्ण संकेत स्वच्छ ऊर्जा को लेकर मिला। रिपोर्ट के अनुसार 82 प्रतिशत भारतीय कोयले की तुलना में सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के पक्ष में हैं। इतना ही नहीं, 65 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारत को अक्षय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना चाहिए, जबकि केवल 14 प्रतिशत लोग जीवाश्म ईंधनों के उपयोग को बढ़ाने के पक्ष में हैं। सर्वेक्षण में शामिल 62 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत के अधिकांश कोयले को जमीन के भीतर ही छोड़ देना देश के स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए बेहतर होगा। वहीं 86 प्रतिशत लोगों ने 2070 तक कार्बन प्रदूषण को लगभग शून्य करने के भारत सरकार के “नेट ज़ीरो” लक्ष्य का समर्थन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जलवायु परिवर्तन के समाधान को लेकर राय
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय सिर्फ जलवायु परिवर्तन को महसूस ही नहीं कर रहे, बल्कि उसके समाधान को लेकर भी स्पष्ट राय रखते हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब भारत का स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में देश की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में 22 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई, जबकि अकेले सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2026 में भारत ने 2035 तक अपनी 60 प्रतिशत बिजली गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का नया लक्ष्य भी दोहराया। इसके बावजूद चुनौती छोटी नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी
मार्च 2026 तक भारत के कुल बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत बनी हुई थी। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक कोयले की खपत दोगुने से भी अधिक हो सकती है। येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सी-वोटर इंटरनेशनल द्वारा तैयार यह अध्ययन दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 5,427 भारतीय वयस्कों पर आधारित है। यह 2011 से भारतीयों की जलवायु संबंधी सोच को ट्रैक करने वाली सर्वेक्षण श्रृंखला का छठा संस्करण है। सर्वेक्षण 12 भाषाओं में किया गया और इसका औसत त्रुटि मार्जिन ±1.3 प्रतिशत अंक है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उभरती है अलग तस्वीर
लंबे समय तक जलवायु परिवर्तन को भविष्य की समस्या कहा जाता रहा, लेकिन इस सर्वेक्षण से एक अलग तस्वीर उभरती है। भारत में बड़ी संख्या में लोग अब यह नहीं पूछ रहे कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है या नहीं। वे कह रहे हैं कि उन्होंने उसे महसूस किया है।
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