हाथ में नकली मशाल लेकर सीएम धामी के नेतृत्व में निकाली गई महिला आक्रोश मशाल यात्रा
एक बार हम फिर से दोहराएंगे कि जब महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसद आरक्षण संबंधी बिल 2023 में सर्वसम्मति से सदन में पारित हो गया, तो इसे लेकर ड्रामा क्यों हो रहा है। क्या देश की जनता को मूर्ख समझ रखा है। करीब ढाई साल से ज्यादा समय तक इस बिल को दबा कर रखा और फिर अचानक 16 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी कर इसे कानून बना दिया गया। फिर दिक्कत कहां हो रही है इसे लागू करने की। दे दो लोकसभा की 543 सीटों पर 33 फीसद आरक्षण। मंशा तो दूसरी है। लोकसभा की सीटें 850 के करीब पहुंचाकर महिलाओं को आरक्षण देने की मंशा है। इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार बताया जा रहा है कि वह महिलाओं के आरक्षण का विरोधी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सवाल ये है कि जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग कर क्यों सरकार सीटें बढ़ाकर आर्थिक बोझ देश में डालना चाहती है। यदि ये बोझ लागू होता है तो एक साल में 50 हजार करोड़ का खर्च देश में बढ़ जाएगा। जिस देश में 80 करोड़ लोग मुफ्त के अनाज पर निर्भर हैं, वहां नेताओं की मौज के संसाधन जुटाए जा रहे हैं। जनता जाए भाड़ में। निर्लज्जता तो देखिए इसे लेकर विधानसभा में विशेष सत्र आयोजित किया गया। फिर बीजेपी ने महिला आक्रोश मशाल यात्रा निकाली गई। दोनों कार्यक्रम में कांग्रेस को पानी पी पी कर कोसा गया। देहरादून में निकाली गई रैली में मशाल यात्रा में मशाल भी असली नहीं थी। कागज और गत्ते की मशाल की फोटो थी। ऐसे में साफ है कि सत्ता के नशा इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि असली मशाल भी हाथ में उठाने में अब कतराने लगे हैं। यात्रा की फोटो भी देख लेना। इसे सरकारी मीडिया ने जारी किया है। इसमें शामिल कई लोग दांत दिखाते नजर आ रहे हैं। यानि वे हंस रहे हैं कि जनता को कैसे आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है। यदि हंसोगे तो फिर आक्रोश कहां गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून में आज गांधी पार्क से घंटाघर तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित महिला आक्रोश मशाल यात्रा निकाली गई। बताया गया कि इस आयोजन में महिला आरक्षण बिल गिरने के विरोध में हजारों की संख्या में माताएं, बहनें और बेटियां शामिल हुईं। इसने स्पष्ट कर दिया कि अब नारी शक्ति अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह सजग और मुखर हो चुकी है। यहां भी ये बताना जरूरी है कि महिला आरक्षण बिल तो सितंबर 2023 में पारित हो चुका है। विपक्ष ने भी इसका विरोध नहीं किया। पीएम नरेंद्र मोदी इस बिल के पारित होने पर दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय से देश की महिलाओं को बधाई भी दे चुके हैं।16 अप्रैल को इसे कानून बना दिया गया। इसके अगले दिन जो बिल गिरा वह परिसीमन और संविधान संशोधन बिल था। अब कितना झूठ परोसोगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सरकार की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह मशाल यात्रा केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ जनाक्रोश है जो महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नारी अब अपने सम्मान और अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़ी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को वर्षों तक लंबित रखा गया, जबकि हाल के प्रयासों ने इसे आगे बढ़ाने का कार्य किया। राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस दिशा में बाधाएं उत्पन्न की गईं, जिसे जनता भली-भांति देख रही है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए यह संदेश दिया कि कुछ राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं हैं और उन्होंने हमेशा इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखा। उन्होंने यह भी संकेत किया कि नई पीढ़ी की महिलाएं अब इन बातों को समझ चुकी हैं और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज की भारतीय नारी केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति बन रही है। केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किए गए प्रयासों को उन्होंने परिवर्तनकारी बताया और यह संकेत दिया कि अब नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी कुछ परंपरागत और परिवारवादी राजनीति करने वाले दलों को असहज कर रही है। इसी कारण वे महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने से कतराते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह विश्वास भी दिलाया कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति ही प्रदेश और देश के विकास का आधार है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यात्रा में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल सहित विभिन्न जनप्रतिननिधि तथा बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आई महिलाएं शामिल रहीं।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


