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July 26, 2026

VIDEO: सैंया भए कोतवाल, फिर डर काहे का, गृह मंत्री अमित शाह ने बगैर मास्क के किया प्रचार, उड़ाई नियमों की धज्जिया

जब सैंया भए कोतवाल, फिर डर काहे का। ये कहावत यूपी में विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान तब नजर आई, जब गृह मंत्री अमित शाह सड़क पर प्रचार को उतरे।

जब सैंया भए कोतवाल, फिर डर काहे का। ये कहावत यूपी में विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान तब नजर आई, जब गृह मंत्री अमित शाह सड़क पर प्रचार को उतरे। जहां चुनाव आयोग विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं को नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए नोटिस जारी कर रहा है, वहीं कैराना में घर घर प्रचार अभियान में जुटे गृह मंत्री अमित शाह को लेकर आयोग का नजरिया दूसरा हो सकता है। शनिवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ता नजर आया जब गृह मंत्री अमित शाह पश्चिमी यूपी के कैराना सीट पर चुनाव प्रचार करने पहुंचे। पश्चिमी यूपी में पलायन के मुद्दे को लेकर सुर्खियों में रहे इस शहर में अमित शाह ने डोर-टू-डोर प्रचार किया. उन्होंने लोगों को बीजेपी के लिए मतदान करने की अपील से जुड़े पर्चे बांटे और सबका अभिवादन भी किया। हालांकि इस दौरान अमित शाह ने मास्क नहीं लगा रखा था और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर चुनाव आयोग के नियम-कायदों की धज्जियां भी उड़ती दिखाई दीं। वहीं, पांच लोगों के डोर टू डोर प्रचार के नियम भी यहां नजर नहीं आए। हालांकि अब इसे बढ़ाकर दस किया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने सिर्फ पांच लोगों के साथ ही डोर-टू-डोर प्रचार की अनुमति दे रखी है। वहीं, अमित शाह के साथ काफी भीड़ दिखी। इस दौरान वहां जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम भी देखे गए। अमित शाह पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ कैराना की तंग गलियों में घूमे। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से जबरदस्त नारेबाजी भी देखने को मिली।
अमित शाह ने कहा कि हमने यहां के लोगों से बात की, उनमें सुरक्षा और आत्मविश्नास का भाव दिखा। लोगों ने कहा कि बेहतरीन कानून व्यवस्था के कारण वो अब सुकून से यहां रह रहे हैं। पलायन की बात करने वाले आज खुद कैराना से पलान कर गए हैं। हालांकि अमित शाह ने कैराना में अपनी जनसभा को स्थगित कर दिया। शाह वहां से सीधा शामली में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में शामिल होने के लिए निकल गए।

गौरतलब है कि पिछली बार यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी को यहां ज्यादातर सीटों पर कामयाबी मिली थी, लेकिन किसान आंदोलन को लेकर पार्टी इस बार घर-घर मतदाताओं का दिल जीतने में पूरी ताकत झोंक रही है। अमित शाह के जमीनी प्रचार में उतरने को कार्यकर्ताओं में जोश भरने की ही रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।