उत्तराखंड कौथिगः चक्रव्यूह नाटक में युद्ध की विभीषिका और मानवीय संवेदनाओं को किया रेखांकित

अखिल गढ़वाल सभा देहरादून की ओर से देहरादून के रेंजर्स कॉलेज के मैदान में उत्तराखंड कौथिग का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हो रहा है। साथ ही विभिन्न मुद्दों पर परिचर्चा भी का जा रही है। इसी कड़ी में दो नवंबर को चक्रव्यूह का मंचम हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सुबह के समय जाने माने शिक्षाविद डॉ. डी.आर. पुरोहित एवं डॉ. सुशील पुरोहित के निर्देशन में प्रस्तुत चक्रव्यूह नाटक में महाभारत के चक्रव्यूह प्रसंग को आधार बनाकर अभिमन्यु के शौर्य, साहस, संघर्ष और अदम्य जिजीविषा को मंच पर साकार किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवादों और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से युद्ध की विभीषिका, मानवीय संवेदनाओं तथा जीवन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया। इस प्रस्तुति की विशेषता इसका सशक्त निर्देशन, कलाकारों का सामूहिक अभिनय, पारंपरिक वेशभूषा तथा संगीत का प्रभावशाली समन्वय रहा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वहीं, शाम को कौथिग स्थल पर उतराखंड के सुप्रसिद्ध गायकों की लोकगीत संध्या का उद्घाटन ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी, स्वामी राम हिमालय यूनिवर्सिटी (SRHU) के अध्यक्ष विजय धस्माना ने दीप जलाकर किया। अतिथियों का स्वागत गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना व महासचिव गजेंद्र भंडारी ने किया। इस मौके पर ग्राम्य विकास मंत्री ने कहा कि अखिल गढ़वाल सभा उत्तराखंड की संस्कृति को बढ़ाने का और संरक्षण का अद्भुत प्रयास कर रही है। विजय धस्माना ने कहा कि सभा ने कौथिग के माध्यम से नई पीढ़ी को मंच दिया है व लोककला को भी संजीवनी प्रदान करी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम की शुरुवात लोकगायक दर्शन फर्स्वाण ने- हे नंदा है गौरा, गीत गा कर किया। साथ मे झावरी बाजलि, गा कर माहौल को आनंदमय कर दिया। दीपा नगरकोटि ने भगवती देवभूमि मा वास और सटके लीगो दिल साथिया, की प्रस्तुति से वाहवाही लूटी। किशन महिपाल अपना नया गीत जिया कोरी कोरी खांदो और फ़्यूनलड़िया त्वे देखि की आन्दो यू मन मा, गा कर दर्शकों को झूमा दिया। लोक गायिका हेमा करासी नेगी ने आन्छरी जागर से शरुआत की और फिर अपना प्रसिद्ध गीत गिर गेंदुआ सुनाया। जौनसारी गायक नरेश बादशाह ने मुख्य लगी तेरी लगन हो देवा महासू महाराज, से शुरुआत करके मेरी शिल्पा गा कर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)पुनः अगले सत्र में दर्शन फर्स्वाण ने झवारी बाजलि, रंगीली भाना और हिट म्यारा पहाड़, की प्रस्तुति दे कर पंडाल में ऊर्जा का संचार कर दिया। दीपा नगरकोटी ने नंदना हाथ कलम स्याही दवात और मोतिमा मदन सुनार गाया। किशन महिपाल ने स्याली भमपाली, रानीखेत रामढोला और म्यार गांव मुनश्यारी प्रस्तुति दी तो तो पंडाल नाच उठा। हेमा करासी नेगी ने जाग नंदा, सोबनू और मेरी बामणी गा कर वाहवाही लूटी। नरेश बादशाह ने दर्शनी तेरी नजरों मा और हसीनो केलिनो गीतों से युवाओं को नचा दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम का समापन किशन महिपाल ने सोबनी बाना गा कर किया और पंडाल को झूमा दिया।।
कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता अजय जोशी ने किया। इस अवसर पर गढ़वाल सभी की उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र असवाल, सहसचिव संतोष गौरोला, प्रवक्ता अजय जोशी के साथ कई संस्कृति कर्मी व साहित्यकर्मी भी उपस्थित रहे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।






