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November 4, 2026

उत्तराखंड कौथिगः अंतिम दिन विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित, कवि सम्मेलन ने बांधा समां

अखिल गढ़वाल सभा देहरादून की ओर से रेंजर्स मैदान में आयोजित उत्तराखंड कौथिग का विधिवत समापन हो गया। अंतिम दिन मंगलवार तीन नवंबर को विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं, शाम को ेेकवि सम्मेलन ने इस समारोह में चार चांद लगा दिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सुबह 11.00 बजे के सत्र में कौथिग स्थल में कई खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें सभा के सदस्यों के साथ दर्शकों ने भी प्रतिभाग किया और खेलों का आनंद लिया। सबसे पहले महिलाओं की म्यूजिकल बॉल प्रतियोगिता हुई। इसमें रंजना को प्रथम पुरस्कार, लक्ष्मी बहुगुणा को दूसरा व कली नेगी को तीसरा पुरुस्कार मिला। इसके बाद 60 वर्ष से नीचे की महिलाओं की हुई। इसमें चमच्च गोली दौड़ में कमलेश सेमवाल प्रथम, गंगा नेगी द्वितीय व मीणा राणा तृतीय आयी। 60 वर्ष से अधिक की आयु की महिलाओं की चमच्च गोली दौड़ में शांता नेगी प्रथम, श्रीमती शकुंतला नेगी द्वितीय व श्रीमती बसंती बिष्ट तीसरे स्थान पर रही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंत मे म्यूजिकल चेयर खेल बहुत मनोरंजक रहा और इसमें कुसुम पटवाल प्रथम, द्वारिका बिष्ट द्वितिय व किरण खंडूरी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कौथिग में शाम छह बजे से गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर जे एन एस बिष्ट रहे और विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार नंद किशोर हटवाल रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कायक्रम का शुभारंभ किया। हटवाल की लिखित कहानी की ढोली, गढ़वाली फ़िल्म को हाल ही में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

कवि सम्मेलन का प्रारंभ कवियित्री प्रिया देवली ने कविता- मेरु अस्तित्व पता नि, तुम मि तैं क्या समझदा, से किया। कोटद्वार से आये कवि राकेश ध्यानी ने- मशक दमो साज रयाँ कोठारों अनाज रयाँ, कविता पढ़ी। पौड़ी से आये मधुसूदन थपलियाल ने-मौत का जागर लग्यां छन आज ब्याली, पढ़ी। घनशाली टिहरी से आई मधुरवादिनी तिवाड़ी ने- अंच्छया मैल्या मुल्क, बिसरया ढोल दमो की चाल। हमुन खूब मनाई बग्वाल, कवि हेमवती नंदन भट्ट हेमू ने एंसु का बग्वाल डेरे मा मनोला, उत्तराखंड बनिगे हे जी मुल्क पाली जौला, कविता पढ़ कर भावुक कर दिया।। कोटद्वार से आई रिद्धि भट्ट ने-समलौन्य रैगिंन, वो गुड्डा गुड़िया, वाला दिन कंचा गुल्ली डंडा कुड़ी बाज्यून वाला दिन, का पाठ किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पौड़ी से वीरेंद्र पंवार ने- पाज हद से मेले से लाचार छन,जॉन बुन्यु छौ तौन गिच्चा म्वाला छन, गाया और वाहवाही लूटी। मदन मोहन ढुकलान ने बरसु बाद, मि घर गौं, सेई कूड़ी बिजिगे और चौक नाचन बैठी गेन, सीढ़ी हिटन बैठी गेन, से दर्शकों की तालियां बटोरी। टिहरी से आये धर्मेंद्र उनियाल ने उमर हवेगी साठ भुला, अब नि रैन ठाट भुला, की प्रस्तुत दी। संचालक डॉ मुनिराम सकलांनी (मुनींद्र) ने अपनी कविता पहाड़ की अटलता की तरों, अटल हमारू विश्वास, प्रस्तुत करके तालियां बटोरी। सुप्रसिद्ध कवि लोकेश नवानी ने कविता को एक बाटो, कोरी धरना अर ऐंच एंचे भजर से निकलदन, कर्णप्रयाग से आए जय विशाल रावत (गढडेसी) ने ना घोर ब्वारी तैं करवा चौथ, अर व्रत करनी करवा चौथ, प्रस्तुत करके कार्यक्रम का समापन किया।। कवि सम्मेलन का संचालन गढ़वाल सभा के साहित्य सचिव डॉ मुनि राम सकलांनी ने किया। इसके साथ ही 10 दिवसीय उत्तराखंड कौथिग का भी समापन हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

समारोह में गढ़वाल सभा अध्यक्ष रोशन धस्माना व महासचिव गजेंद्र भंडारी ने 10 दिवसीय कौथिग के समापन दिवस पर समस्त आए हुए कलाकारों, प्रायोजकों, अतिथियों, दर्शकों व मीडिया व समाचार पत्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस बार सभी लोगों के सहयोग से कौथिग में बहुत भव्यता आ गई। उन्होंने भविष्य में भी सहयोग की अपेक्षा की । इस अवसर पर सभा की उपाध्यक्ष श्रीमती निर्मला बिष्ट, प्रवक्ता अजय जोशी, पंडित उदय शंकर भट्ट, वीरेंद्र असवाल, नत्था सिंह पंवार, डॉ सूर्य प्रकाश भट्ट, आदि उपस्थित थे। कौथिग स्थल में स्वास्थ्य शिविर में हेल्थ नेटवर्किंग सेवा संस्थान द्वारा निः शुल्क हेल्थ कैम्प में 114 लोगो ने जाँच कराई। कैम्प के आयोजन में फिजिशियन डा नन्द उनियाल, डा एम पी मैंठानी, भट्टऑप्टिकल्स से डा एस पी भट्ट, डा वी के नौटियाल, आभा शर्मा का सहयोग रहा।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।