उत्तराखंड में आज धरना प्रदर्शन का दिन, विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, सड़क पर रही अंकिता भंडारी की गूंज
उत्तराखंड सरकार ने आज विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया। विषय था कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम। यानि कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसद आरक्षण। अब कोई मूर्ख भी समझ जाएगा कि इस सत्र की जरूरत नहीं है। क्योंकि महिलाओं को आरक्षण देने के संबंध में बिल संसद के दोनों सदन में वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका था। इसके बाद तक केंद्र सरकार सोती रही। फिर अचानक 16 अप्रैल 2026 को इसकी अधिसूचना जारी करने के साथ ही इसे कानून बना दिया गया। इसे लागू करने के बाद दिक्कत कहां है। 543 लोकसभा सीटों में 33 फीसद का आरक्षण देने में क्या परेशानी है। मंशा तो दूसरी है। लोकसभा की सीटें 850 के करीब पहुंचाकर महिलाओं को आरक्षण देने की है। अब इसका विरोध हो रहा है। जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग कर क्यों सरकार आर्थिक बोझ देश में डालना चाहती है। यदि ये बोझ लागू होता है तो एक साल में 50 हजार करोड़ का खर्च देश में बढ़ जाएगा। इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने आज 28 अप्रैल को विधानसभा कि विशेष सत्र आयोजित किया। इसके फायदे गिनाने के लिए। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला और विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नारी शक्ति वंदन यदि करना है तो अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों को सजा मिले। नतीजा ये रहा कि विभिन्न दलों ने कहा अंकिता भंडारी को न्याय दो। वहीं विधानसभा में महिला आरक्षण की बात लेकर सरकार ने अपना पक्ष रखा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने किया प्रदर्शनअंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से देहरादून विधानसभा का प्रतिकात्मक घेराव किया गया। उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत ने कहा कि भाजपा सरकार एक दिन नारी शक्ति वंदन विधानसभा सत्र लाकर महिला हितैषी होने की नौटंकी कर रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड को तीन वर्ष से भी ऊपर हो गए। उस हत्या के VIP अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं, लेकिन आजतक उनको ना गिरफ्तार किया गया ना उनपर कारवाई हो रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी पूरी ने ताकत लगा रखी है कि किसी तरह अंकिता हत्याकांड के VIP अपराधियों को बचाया जाए। क्योंकि जिन VIP के नाम सामने आए हैं वो दुष्यंत गौतम और अजय कुमार भाजपा के बड़े पदाधिकारी हैं। मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और भाजपा सरकार को नारी वंदन के नाम पर एक दिन का विधानसभा सत्र करते हुए शर्म नहीं आती है। प्रदेश में आए दिन स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। प्रदेश में आए दिन महिलाओं की हत्या हो रही है। पहाड़ में जंगली जानवरों के हमलों के कारण महिलाएं अपनी जान गंवा रही हैं। अंकिता भंडारी की हत्या के VIP अपराधी भाजपा नेताओं के साथ खुलेआम घूम रहे हैं। क्या भाजपा सरकार ने महिलाओं के इन विषयों पर कभी चर्चा की। एक दिन का नारी वंदन सत्र की राजनीतिक नौटंकी कर रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मंच की उमा भट्ट ने कहा भाजपा का चाल चरित्र महिला विरोधी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड के VIP अपराधियों को पालने पोषने वाली भाजपा नारी वंदन के नाम पर केवल राजनीतिक नौटंकी कर रही है। मंच की आंदोलनकारी ऊषा भट्ट ने कहा भाजपा महिलाओं का शोषण करने वाली पार्टी है और उनके राज में लगातार महिला अपराध बढ़ रहे हैं। अंकिता भंडारी की हत्या में भी भाजपा से जुड़े लोग ही थे, यही भाजपा का चाल और चरित्र है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मंच ने चेतावनी दी कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के VIP अपराधियों को गिरफ्तार करके सजा नहीं दी जाती तो वो भाजपा के पदाधिकारियों का घेराव करेंगे। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने देहरादून में धर्मपुर स्थित एलआईसी बिल्डिंग से रैली निकालते हुए विधानसभा की तरह कूच किया। उन्हें पुलिस ने रिस्पना पुल के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। बैरकेडिंग पार करने की कोशिश में मंच के आंदोलनकारियों की ओर से पुलिस के धक्का मुक्की हुई। मंच के सदस्य बैरिकेडिंग के पास ही सड़क पर बैठ गए और सभा की। साथ ही भाजपा सरकार को महिला विरोधी बताते हुए नारे लगाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
विधानसभा घेराव में पूर्व कमिश्नर एस एस पांगती, ऊषा भट्ट, पद्मा गुप्ता, विमला कोली, विपिन नेगी, ब्रिगेडियर(रि.) सर्वेश डंगवाल, पी सी थपलियाल, पूर्व आईएएस विनोद रतूड़ी, पंकज क्षेत्री, शकुंतला, मंजू बलोदी, विजया नैथानी, अनिल डोभाल, सूरज नेगी, तुषार, मातेश्वरी रजवार, भुनेश्वरी कठैत कृष्णा सकलानी, तान्या, दीपा, पार्वती नेगी , सुशीला अमोली, सुलोचना आदि कई लोग शामिल हुए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
विधानसभा घेराव में महिला कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन
33% महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग को लेकर उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस ने आज प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में विधानसभा घेराव कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग को बुलंद किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम के तहत महिला कांग्रेस की पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति हिम पैलेस नेहरू कॉलोनी में एकत्रित हुईं, जहां से विधानसभा की ओर एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। मार्च के दौरान “महिला आरक्षण लागू करो”, “आधी आबादी को पूरा हक दो” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
विधानसभा से कुछ दूरी पहले ही पुलिस प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा बैरिकेडिंग पार करने को लेकर हल्की झड़प की स्थिति भी बनी। पुलिस द्वारा कई महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले जाया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत भी पहुंचे और आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार देने में देरी लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। सरकार को तुरंत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि संसद द्वारा वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने के बावजूद आज तक 33% महिला आरक्षण लागू नहीं किया जाना सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन के नाम पर महिलाओं के अधिकार को लगातार टाला जा रहा है, जिसे महिला कांग्रेस किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। जब तक महिलाओं को उनका हक नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश और देश की महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी हैं और उन्हें दबाया नहीं जा सकता। महिला कांग्रेस हर स्तर पर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन में महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता जया कर्नाटक, पुष्पा पवार, अंशुल त्यागी, आशा रावत, सुशीला शर्मा, अंजू मिश्रा, शशि शाह, अनीता सकलानी, शोभा बडोनी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसके अलावा ललित भद्री, बबलू पंवार, शहीद जमाल, आलोक मेहता, नरेश सकलानी, बंटू, गौरव रावत, नितिन उनियाल, अनुज, अनुराग कंसवाल, अभिमन्यु, साहिल शेख, प्रियांशु गौड़, सूरज सहित युवा कांग्रेस के साथियों एवं बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही, जिससे आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सामाजिक एवं राजनीतिक व श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन
देहरादून में एलिवेटेड रोड का विरोध, उत्तराखंड आंदोलनकारियों चिह्नीकरण तथा श्रम कानूनों को लागू करने के मुद्दे पर सामाजिक एवं राजनीतिक व श्रमिक संगठनों ने विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की। साथ ही राज्य आंदोलन में छूट गए आंदोलनकारियों के पुन: चिह्नीकरण की मांग, राज्य श्रम कानूनों को लागू करने की मांग की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन के बाद संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम अर्पणा ढोंडियाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तीन मुख्य मांगें रखी गईं। पहली मांग में रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड तुरंत रद्द करने की मांग है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 26 किमी लंबी यह परियोजना अत्यधिक महंगी (अनुमानित लागत 4,500 करोड़ से बढ़कर 6,200 करोड़, 8-10 हजार करोड़ तक पहुंचने की आशंका) और हज़ारों परिवारों के विस्थापन का कारण बनेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दूसरी मांग में छूटे हुऐ आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण वर्ष 2004-05 के प्रारंभिक मापदंड के तहत किया जाए। बिना साक्ष्य वालों के लिए उस समय के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित नाम व फोटो को पर्याप्त आधार माना जाए। जिला स्तर पर वास्तविक आंदोलनकारियों की समिति बनाई जाए। इस मौके पर रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर) में सीआईटीयू के नेतृत्व में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने विधानसभा पर प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को एक अलग ज्ञापन प्रेषित किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रमुख मांग
वीगार्ड फैक्ट्री रूद्रपुर सहित प्रदेश की फैक्ट्रियों में श्रमिक उत्पीड़न रोका जाए।
न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये किया जाए।
प्रदेश में श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए और मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए।
स्कीम वर्करों को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। पिछले छह माह से फ्रीज श्रम कानूनों को तुरंत बहाल किया जाए।
प्रदर्शन में बस्ती बचाओ आंदोलन, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद, सीआईटीयू, यूकेडी, राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी, आयूपी, नेताजी संघर्ष समिति सहित कई संगठन शामिल हुए। एसडीएम ने ज्ञापन लेकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ज्ञापन देने वालों में बस्ती बचाओ आन्दोलन के संयोजक अनंत आकाश, सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, यूकेडी नेत्री प्रमिला रावत, आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गुंसाई, सुरेश कुमार, अमित परमार, विकास रावत, आरयूपी के महामंत्री वालेश बबानिया, भगवंत पयाल, अभिषेक भंडारी, रविंद्र नौडियाल, एन एस पंवार, सतीश धौलाखंडी, सुमिता रावत, नितिन बौंठियाल, सुनीता बहुगुणा, कल्पेश्वरी, यशोदा, राजी, मीरा गुंसाई, विमला, रमेश रावत, चिन्तन आदि शामिल रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जनता की गाड़ी कमाई की बर्बादी है विधानसभा का विशेष सत्र
उत्तराखंड राज्य की विधानसभा में आज महिला आरक्षण को लेकर एकदिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक शर्मा और उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर कड़ा पलटवार किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रेस वार्ता में आलोक शर्मा ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम वर्ष 2023 में ही संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इसके बावजूद भाजपा केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर देश की जनता को गुमराह करने का काम कर रही है। जिस बिल को संसद के विशेष सत्र में लाया गया, वह वास्तव में महिला आरक्षण से जुड़ा नहीं, बल्कि एक परिसीमन संशोधन बिल था, जो पूरी तरह से विभाजनकारी और सत्ता केंद्रीकरण का प्रयास था। विपक्ष की एकजुटता के कारण भाजपा का यह मनमाना बिल पास नहीं हो सका, क्योंकि यदि यह पारित हो जाता, तो भाजपा को असीमित शक्तियां मिल जातीं और लोकतांत्रिक संतुलन पर गहरा आघात होता। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड सरकार द्वारा बुलाया गया यह विशेष विधानसभा सत्र असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। आलोक शर्मा ने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण पर अंतिम निर्णय संसद को करना है, तो राज्य की विधानसभा में करोड़ों रुपये खर्च कर इस सत्र का औचित्य क्या है? लगभग 8 करोड़ रुपये जनता के टैक्स का पैसा इस दिखावटी सत्र पर खर्च किया जा रहा है। क्या यह पैसा उत्तराखंड की महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगार युवाओं, या धरने पर बैठी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता था? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि आज सच्चाई यह है कि NCRB के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में महिला अपराध में शीर्ष पर पहुंच चुका है, लेकिन सरकार इस पर चर्चा करने से बच रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। उस पर इस विशेष सत्र में एक शब्द तक नहीं। नर्सिंग बेरोजगार सड़क पर हैं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आंदोलन कर रही हैं, लेकिन सरकार को सिर्फ राजनीतिक भाषण देना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच और विरासत बिल्कुल अलग है। जब दुनिया के बड़े लोकतंत्र महिलाओं को उनके अधिकार यहां तक की मताधिकार देने में पीछे थे, तब कांग्रेस ने न सिर्फ आजादी के समय पर ही महिलाओं को बराबरी का दर्जा दे दिया बल्कि एनी बेसेंट (1917), सरोजिनी नायडू (1925), नेली सेनगुप्ता (1933) जैसी महिलाओं को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रेस वार्ता में कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर धामी सरकार को किसने यह अधिकार दिया कि वह जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह पानी की तरह बहाए। दसौनी ने कहा कि आज भी उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में प्रसव के दौरान महिलाओं को हाथ से बनी दांडी-डंडियों के सहारे मुख्य मार्ग तक लाया जाता है। विशेष सत्र में जो पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, वह इस बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में लगाया जा सकता था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मामले में नया खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने वीआईपी के नाम को लेकर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। इस नए खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


