साथियों को रोकने को उनके पीछे लगाई दिल्ली तक दौड़, काऊ ने नाराजगी का जो किया खुलासा, वो तो तब ही हो चुका प्रकाशित
उत्तराखंड में भाजपा के बाजपुर विधायक यशपाल आर्य और उनके बेटे नैनीताल विधायक संजीव आर्य भाजपा छोड़कर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए। तब कहा जा रहा था कि इनके साथ ही रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ भी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। यह तक कहा गया कि पूर्व सीएम हरीश रावत ने उनकी कांग्रेस में वापसी पर अड़ंगा लगा दिया और वे कांग्रेस में शामिल नहीं हो पाए। इस बीच ये भी चर्चाएं सामने आई कि उमेश काऊ को राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी ने रोक लिया। दिल्ली से लौटकर दून पहुंचे रायपुर विधायक ने अपने दिल्ली जाने को लेकर सफाई दी। साथ ही उन्होंने कुछ पुरानी बातें भी उजागर की। हालांकि उनकी इन बातों का दिल्ली जाने से कोई सीधा संबंध नहीं दिख रहा है। फिर भी उन्होंने ये बताने का प्रयास किया कि वह नाराज लोगों को मनाने में पहले भी मध्यस्थता कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि कि धामी के सीएम बनने के दौरान तीन विधायकों में नाराजगी थी। उन्होंने शपथ लेने से मना कर दिया था। हालांकि, जो बात काऊ ने नाराजगी वाली बताई वो नई नहीं है। इसे लोकसाक्ष्य सहित कई पोर्टल व समाचार पत्र उसी दौरान प्रकाशित कर चुके थे। इसका लिंक यहां नीचे दिया जा रहा है।-पुष्कर धामी ने ली उत्तराखंड के 11वें सीएम के रूप में शपथ, रूठों को मनाने में कामयाब रही भाजपा, मंत्रिमंडल में वही चेहरे
अब रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने अपने दिल्ली दौरे को लेकर रहस्य से पर्दा उठाने का प्रयास किया। हालांकि लोगों को उनका ये दावा हजम नहीं हो रहा है। क्योंकि काफी समय से वह बीजेपी में उपेक्षित चल रहे हैं। उन्हें कार्यकर्ताओं का ही कई बार विरोध झेलना पड़ा। कारण ये है कि कांग्रेस पृष्ठभूमि के नेताओं को भाजपा कार्यकर्ता पचा नहीं पाते हैं। ऐसे में बात बात पर विवाद सड़कों पर उजागर हो जाता है। कहा तो ये जा रहा है कि उमेश काऊ न तो कांग्रेस में जा पाए और न ही भाजपा में उनकी स्थिति बेहतर है। फिलहाल उनकी स्थिति बीच की है। हालांकि प्रचारित तो ये भी किया जा रहा है कि उन्हें यशपाल आर्य के खाली हुए कैबिनेट मंत्री का पद दिया जा सकता है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि दिल्ली तक उनकी दौड़ दबाव बनाने की राजनीति की है। ताकि उन्हें मंत्री पद मिल सके।
उत्तराखंड में सियासी उठापठक के बीच रायपुर क्षेत्र से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ का ने मीडिया से बातचीत में अपने दिल्ली दौरे पर स्थिति साफ करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान जानता है कि वह कहां और क्यों गए थे। उन्होंने कहा कि उनके पुराने साथी पार्टी छोड़कर जा रहे थे, उनका प्रयास था कि वह इनकी राष्ट्रीय नेतृत्व से बात करा दें।
विधायक काऊ ने यह भी कहा कि जुलाई में सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद जब पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने तो तीन वरिष्ठ साथी हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज और यशपाल आर्य नाराज थे। तीनों मंत्री पद की शपथ नहीं लेना चाहते थे। तब गृह मंत्री अमित शाह ने 13 से 14 बार उन सभी को फोन किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व के कहने पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई और राष्ट्रीय नेतृत्व से तीनों की बात कराई। परिणामस्वरूप मसला सुलझा और तीनों विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, बल्कि उनके मंत्रालयों में इजाफा भी हुआ।



