उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मजदूरों और किसानों का तीन दिवसीय महापड़ाव 26 से, जानिए क्या हैं मुद्दे
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मजदूरों और किसानों का तीन दिवसीय महापड़ाव 26 से 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। ये महापड़ाव केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है। देहरादून में इसका आयोजन दीनदयाल पार्क में होगा। इसमें तीन तक राज्यभर के मजदूर, किसान शामिल होंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
महापड़ाव की तैयारियों को लेकर आज देहरादून में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें केन्द्र की मोदी सरकार पर लगातार किसान तथा मजदूरों के साथ ही आमजन के खिलाफ जनविरोधी कानून बनाने की कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि जीवन के हरेक क्षेत्र उधोग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार, सार्वजनिक प्रतिष्ठान पर एक के बाद हमले ने वर्षों से हमारे मूलभूत ढांचें की बुनियादी परिवर्तन कर कारपोरेट के लिये रास्ता खोल दिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बड़ी परियोजनाओं से पर्यावरण को नुकसान
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में अनियोजित विकास के चलते सड़क, विद्युत की भीमकाय परियोजनाओं राज्य के पर्यावरणीय तथा जलवायु को भारी क्षति पहुंचाने का कार्य किया है। इसके चलते 2013 केदारनाथ त्रासदी, 2020 में जोशीमठ के पास टनल में 200 मजदूर जिन्दा दफन हुए। अब सिलक्यारा टनल ढहने से 41 मजदूर अपने जीवन बचाने के लिए जुझ रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अल्पसंख्यक और गरीब विरोधी है सरकार
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड सरकार गरीब और अल्पसंख्यक विरोधी है। गरीबों में खासकर अल्पसंख्यक समुदाय को अतिक्रमण के नाम पर बेदखल करना आम बात है। स्मार्ट सिटी एवं लोकलुभावन नीतियां कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाली हैं। सरकार का प्रस्तावित इन्वेस्टर समिट अन्तत: कारपोरेट तथा अन्तर्राष्ट्रीय पूंजी घरानों को मदद पहुंचायेगा। इसकी कीमत राज्य की जनता को चुकानी पड़ रही है रेलवे प्रोजेक्ट के चलते ऐतिहासिक एवं हराभरा क्षेत्र मलेथा गांव कंक्रीट में बदल दिया। आम जनता बिजली दरों की भारी कीमत देने के लिए विवश हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये हैं प्रमुख मुद्दे
-चार श्रम कोड वापस लेने ,ठेका प्रथा बन्द करने ,असंगठित क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी।
– खाद्य सुरक्षा की गारन्टी, पेट्रोलियम पदार्थों, रसोई गैस मूल्यवृद्धि वापस ली जाए।
-सार्वजनिक वितरण प्रणाली मजबूत करने तथा इसका दायरा बढ़ाया जाए।
-गन्ने का मूल्य 500 रूपये प्रति क्विंटल करने।
-जंगली जानवरों से फसलों एवं जानमाल की सुरक्षा के साथ मुआवजे की गारन्टी।
-प्रस्तावित बिजली बिल वापस लेने तथा बिजली प्री पेड स्मार्ट मीटर का प्रस्ताव वापस लेने।
-काम के अधिकार कौ मौलिक अधिकार घोषित करने। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
-किसानों की कर्ज माफी घोषित करना।
-संविधान के बुनियादी ढांचे पर हमला बन्द किया जाए।
-कारपोरेटपरस्त बीमा योजना समाप्त करते हुए फसलों के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा योजना स्थापित करने।
-वनाधिकार अधिनियम को कढ़ाई से लागू किया जाए।
-राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 26 हजार लागू हो।
-सभी आवासहीनों को आवास दिया जाए।
-नियमित रूप से श्रम सम्मेलन हो। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
– सभी के लिये मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल, स्वच्छता का अधिकार हो। नई शिक्षा नीति वापस ली जाए।
-उपनल, संविदा व ठेका कर्मियों को हाई कोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार समान काम का समान वेतन, भत्ते की सुविधा, वर्षो से कार्यरत इन श्रमिकों नियमित किया जाए।
-गढ़वाल मंडल विकास निगम को पीपीपी मोड में देने पर रोक लगे।
-उत्तराखंड में केंद्रीय संस्थानों में कार्यरत संविदा, ठेका मजदूरों के शोषण पर रोक लगाई जाए। इनके निकालने पर रोक लगाई जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में सीटू के प्रांतीय सचिव लेखराज, किसान सभा के प्रसन्तीय महामन्त्री गंगाधर नौटियाल, इंटक के जिला अध्यक्ष अनिल कुमार, एटक के प्रांतीय महामन्त्री अशोक शर्मा, उपाध्यक्ष समर भंडारी, किसान एकता मंच के परवीन कुमार, बुद्धि सिंह चौहान, वीरेंद्र सिंह नेगी आदि विचार रखे।
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