महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा सीयूईटी अब हो चुकी है औचित्यहीनः डॉ सुनील अग्रवाल
डॉ. सुनील अग्रवाल
निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ सुनील अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा सीयूईटी अब औचित्यहीन हो चुकी है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र भेजकर विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया को सीयूईटी से मुक्त करने की मांग की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा की प्रवेश परीक्षा की आवश्यकता तब थी जब स्टूडेंट ज्यादा थे और स्टूडेंट के सापेक्ष कॉलेजों में सीटें कम थी। तब प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रतिभावान छात्रों को प्रवेश समय की आवश्यकता थी। अब पूरे देश में प्राइवेट विश्वविद्यालयों की भरमार हो चुकी है। ऐसे में कॉलेजों में छात्रों का अभाव हो चुका है। कॉलेजों की विभिन्न कोर्स की सीटें अक्सर खाली रह जाती हैं। फिर सीयूईटी परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर छात्रों का प्रवेश होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि प्रवेश की इस प्रक्रिया से समय की बर्बादी होती है और छात्रों में असमंजस का भाव बना रहता है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मेरिट के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया जारी होनी चाहिए। इससे छात्रों का प्रवेश समय पर हो सकेगा और छात्रों के समय और धन की बर्बादी नही होगी। उन्होंने कहा कि वैसे भी सीयूईटी की परीक्षा करवाने वाली संस्था अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
डॉ अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान वर्ष में भी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए छात्रों के परीक्षा केंद्र अन्य प्रदेशों में बना दिया गए। इसका कोई औचित्य नहीं है। यह समस्या हर वर्ष आती है। छात्रों के परीक्षा केंद्र दूर दराज के क्षेत्र में बना दिए जाते हैं। अब सीयूईटी की परीक्षा मात्र परीक्षा एजेंसी को लाभ देने के उद्देश्य के लिए ही दिखाई देती है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


