चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस की जांच में साजिश का खुलासा, बदले की भावना में रचा गया षड्यंत्र
चंपावत में किशोरी के साथ बीजेपी नेता सहित तीन लोगों की ओर से किए गए सामूहिक दुष्कर्म की खबर सामने आई और इसे विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों ने मुद्दा बनाया और पूरे उत्तराखंड में धरने प्रदर्शन का सिलसिला जारी कर दिया। इस बीच पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया और बताया कि कहानी फर्जी है। गौरतलब है कि चंपावत से ही सीएम धामी विधायक हैं। ऐसे में ये मामला सरकार की नाक का सवाल हो गया था। अब नई कहानी में कितनी सच्चाई है ये हमें पता नहीं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये लगे थे आरोप
मीडिया रिपोर्ट की सुर्खियां बनी इस खबर में कहा गया कि चंपावत में दोस्त संग शादी में गई 16 साल की किशोरी से उसके दोस्त, बीजेपी नेता समेत तीन लोगों ने चाकू की नोक पर उसके साथ गैंगरेप किया। सुबह वह सुनसान घर में निर्वस्त्र मिली। उसके हाथ पैर बंधे हुए थे। पुलिस ने केस दर्ज किया और आरोपी फरार हो गए। आरोपियों में एक बीजेपी नेता, एक पूर्व प्रधान है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उत्तराखंड पुलिस ने दी ये जानकारी
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय की और से दी गई जानकारी में कहा गया कि छह मई 2026 को वादी की ओर से एक लिखित तहरीर प्रस्तुत कर अवगत कराया गया कि दिनांक 05.05.2026 की रात्रि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ तीन व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म किया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली चंपावत में तत्काल पोक्सो एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंपावत की ओर से तत्काल क्षेत्राधिकारी चंपावत के पर्यवेक्षण में 10 सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन कर निष्पक्ष एवं गहन विवेचना करने के निर्देश दिये गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने स्वयं पीड़िता से बातचीत कर घटनास्थल पर जाकर स्थानीय लोगों से वार्ता कर घटना की जानकारी ली। गठित पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्यों को संरक्षित किया तथा आरएफएसएल उधम सिंह नगर की फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल का परीक्षण कराया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पुलिस की ओर से बताया जा रहा है कि पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण करने के साथ ही CWC के समक्ष काउंसिलिंग एवं न्यायालय के समक्ष बयान दर्ज कराये गए। पीड़िता की देखरेख एवं सुरक्षा के लिए जिलाधिकारी से पत्राचार कर एक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। विवेचना के दौरान असल कहानी सामने आई। ऐसा दावा पुलिस का है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
विवेचनात्मक कार्यवाही
-विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता ग्राम सल्ली में विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ गई थी।
– घटना दिवस पर पीड़िता का विभिन्न स्थानों पर आवागमन एवं गतिविधियां सीसीटीवी फुटेज व सीडीआर से सत्यापित हुई हैं।
-चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाह्य अथवा आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट चिकित्सीय संकेत प्राप्त नहीं हुए हैं।
-कुछ गवाहों के बयान तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल खाते नहीं पाए गए, जिससे घटनाक्रम की सत्यता प्रमाणित नहीं होती है।
-कमल रावत, पीड़िता एवं पीड़िता की महिला मित्र के मध्य घटना तिथि पर असामान्य रूप से बार-बार संपर्क/वार्तालाप पाया गया है, जो प्रकरण के घटनाक्रम के संबंध में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करता है।
-घटना के दौरान नामजद व्यक्तियों क्रमशः विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत, पूरन सिंह रावत की मौजूदगी घटनास्थल पर नहीं पाई गई, साथ ही गवाहों के बयानों व तकनिकी साक्षयों से इस बात की पुष्टि हुई कि घटना के दौरान नामजद व्यक्ति मौके पर नहीं थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कमल रावत के बारे में
हमने कमल रावत के बारे में सर्च किया तो आज तक की एक खबर दिखाई दी। इसकी हेडिंग थी कि- नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी कमल रावत गिरफ्तार, POCSO के तहत दर्ज है मामला। इस खबर में लिखा गया था कि उत्तराखंड के चंपावत में बीजेपी के एक नेता पर रेप का आरोप लगा है। ये खबर एक जनवरी 2024 की है। खबर में लिखा गया कि पुलिस ने रावत के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। पीड़िता की मेडिकल जांच हुई, लेकिन कोर्ट में उसका बयान दर्ज नहीं हो सका। भाजपा के चंपावत जिला अध्यक्ष निर्मल मेहरा ने कहा कि रावत को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। 29 दिसंबर को कमल पर एक नाबालिग से दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। मुकदमा दर्ज होने के एक दिन बाद कमल रावत को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ताजा खबर को लेकर पुलिस का तर्क
पुलिस अधीक्षक चंपावत ने बताया विवेचना के दौरान पुलिस की ओर से प्रत्येक तथ्य का वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष परीक्षण किया गया है। मामले में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए तथा दोषी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित हो, इस उद्देश्य से सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच जारी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बदले की भावना
– पुलिस के प्रेस नोट में कहा गया कि कमल रावत ने बदले की भावना से प्रेरित होकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नाबालिक बालिका को झूठा प्रलोभन व बहला-फुसलाकर अपने बदले की पूर्ति के लिए घटनाक्रम रचा गया था।
– पुलिस के मुताबिक, डिजिटल एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण प्रगति पर है।
– संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन जारी है।
– यदि जांच के दौरान तथ्यों को भ्रामक/मनगढ़ंत पाया जाता है, तो विधि अनुसार सुसंगत धाराओं में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पुलिस ने किया ये अनुरोध
उत्तराखंड पुलिस ने कहा कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाती है। साथ ही, किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, झूठे आरोपों को भी गंभीरता से लेते हुए विधिक कार्रवाई की जाएगी। आम जनमानस एवं मीडिया बंधुओं से अनुरोध है कि प्रकरण की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रकाशन/प्रसारण करें।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


