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May 27, 2026

एसआरएचयू के डॉ. मुकेश प्रसाद के शोध को यूएन रिपोर्ट में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट के मेडिकल फिजिक्स विभाग में सहायक प्रोफेसर मुकेश प्रसाद बिजल्वाण के शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। उनके दो शोध पत्रों को संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक समिति ऑन द इफेक्ट्स ऑफ एटॉमिक रेडिएशन (यूएनएससीईएआर) की प्रतिष्ठित रिपोर्ट “सोर्सेज, इफेक्ट्स एंड रिस्क्स ऑफ आयोनाइजिंग रेडिएशन” में शामिल किया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यूएनएससीईएआर की स्थापना संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1955 में की थी। यह संस्था आयोनाइजिंग रेडिएशन के मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है। इसकी रिपोर्टों का उपयोग दुनिया भर की सरकारें और नीति निर्माता विकिरण सुरक्षा मानकों एवं नीतियों के निर्माण में करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डॉ. मुकेश प्रसाद पिछले 15 वर्षों से आयोनाइजिंग रेडिएशन और उसके मानव स्वास्थ्य पर प्रभावों से जुड़े शोध कार्यों में सक्रिय हैं। उनका शोध भारत के सामान्य और उच्च विकिरण वाले क्षेत्रों में रेडॉन, थोरॉन और उनसे होने वाले विकिरण प्रभावों के अध्ययन पर केंद्रित है। उन्हें वर्ष 2025 में एल्सेवियर-स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में भी शामिल किया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

साथ ही उन्हें वर्ष 2016 में ताइवान में यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से नेशनल पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में कई बेस्ट पेपर अवॉर्ड मिल चुके हैं। डॉ. मुकेश प्रसाद अमेरिका, जापान, ताइवान और जर्मनी सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने शोध कार्य प्रस्तुत कर चुके हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डॉ. मुकेश प्रसाद ने बताया कि यूएनएससीईएआर की रिपोर्टों में अब तक मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोपीय देशों के आंकड़ों को अधिक स्थान मिलता रहा है, जबकि एशियाई देशों के शोध अपेक्षाकृत कम शामिल किए जाते थे। ऐसे में उनके शोध पत्रों का इस रिपोर्ट में शामिल होना भारत के वैज्ञानिक योगदान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. मुकेश प्रसाद की सफलता विश्वविद्यालय के शोध और अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एसआरएचयू के शोध कार्यों को मिल रही पहचान युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक है और इससे भारतीय वैज्ञानिक समुदाय की वैश्विक उपस्थिति और मजबूत होगी।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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