Recent Posts

Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Recent Posts

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

October 16, 2026

शिक्षिका हेमलता बहुगुणा की कविता-चाह है दिल में पाने की

शिक्षिका हेमलता बहुगुणा की कविता-चाह है दिल में पाने की।

चाह

चाह है दिल में पाने की
उसे पाने का जज्बा रखना
और जब तक हासिल न हो
तब तक मेहनत करते रहना।

पा लो बुलंदियां कुछ भी
अपना धर्म बचाये रखना
तुम मानव हो मानवता को
हमेशा बचाये रखना।

पड़े न नजर बुरी इस पर
संयम अपना बनाये रखना
एक छोटी चाह के लिए
मर्यादा अपना दमन न करना।

शोहरत ईश्वर ने नवाजी तुम्हें
शोहरत को बचाये रखना
किसी और शोहरत के लिए
अपने को दमन न करना।

सुन्दर सौहार्द्र बनाया तुझको
इसको कभी खोने न देना
बनाये रखना इसको उज्जवल
हमेशा इसका ध्यान रखना।

चाह है दिल में पाने की उसे
पाने का जज्बा रखना

कवयित्री का परिचय
नाम-हेमलता बहुगुणा
पूर्व प्रधानाध्यापिका राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय सुरसिहधार टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड।

Bhanu Prakash

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।