विषय -मंजिल डरते क्यों हो तुम उलझनों सेतुम राह पर चलना तो सीखोदूर नहीं अब कहीं मंजिलतुम ये सोचकर तो...
कविता
मध्य हिमालै ? ऊंचा हिवांळों ह्यूं की चादर,रूमझुम बरखा मध्य हिमालै ।धारूं - धारूं बादळ माळा ,ठंडु बथौऊं मध्य हिमालै...
ख्वाहिश मैंने भगवान से मांगी शक्ति,उसने मुझे दी कठिनाइयांहिम्मत बढ़ाने के लिए !मैंने भगवान से मांगी बुद्धि ,उसने मुझे दी...
स्वाचा-स्वाचा, भलु-भलु स्वाचा,भलु सोचिक, भलु - ज्यू ह्वे जांद.बगत - बगत, सोची - सोची क -बित्यूं बगत, कबि याद भि...
खास हो तुम… खुबियो का तो दिवाना सारा जहाँ है….तुम लाख खामिया होने के बाद किसी को चाहो….तो खास हो...
प्यारू उत्तराखंड " तेरा जिल्लौं से बड़ि छायू , प्यारू उत्तराखंड.बीस साल ह्वीं राज्य बड़्यां , प्यारू उत्तराखंड.. करि आंदोलन...
ज़िंदगी इतनी भी आसान नही है…थोडी मुश्किल है थोडा सन्घर्ष है…..हर मुश्किलो को पार कर जाओ…तभी तो तुम्हारी जीत है….....
हे प्रभु मन में दीप जलाओ अंधकार से मुझे निकालो ,सच्चाई की राह दिखा लो ।सही ड़गर क्या मुझे बताओ...
का गे होली चैत की मैना की काफल पाकी,घुरौंदी घुघूती की प्यारी सांखी।उड़दा पन्छ्यों की कन भली टोली,का गे होली...
चलो दीप जलाएं चलो सखी कुछ ऐसे दीप जलाएं।हर घर जो, उजियाला फैलाएंसूने पड़े द्वारों को सजाएंआते जाते राही को...
