लोकतंत्र है यह कैसा? जहां चले बस तानाशाही और पैसा, मांगते जो चुनाव में वोट… छापते फिर उसपर नोट। लोकमत...
साहित्य
आखिर ये वक्त बीत ही गया कोई खो गया कोई सो गया, कोई मिल गया, कोई रो गया। कोई जीत...
मनोभाव सोचता हूँ मैं भी अक्सर कुछ ऐसा अब कर जाऊँ । ऋषयों की भाँति मैं भी परमतत्व को जान...
यह दक्खण पंथ भी देख लिया जी ! न चुनाव हुए - न राजा हारे, बिना जंग 'सूबे' दार हैं...
आदतें छोड़ी तो नहीं बर्फ ने पिघलना, लकड़ी ने जलना धरती ने उगलना बादल ने गरजना आदतें छोड़ी तो नहीं,...
मैं कवि नहीं मैं कवि नहीं फिर भी, कुछ मन की बातें लिख लेता हूं। कभी कभी कोरे पन्नों पर,...
मैं एक नारी हूँ अपने हालतों पर भारी हूँ जलायी गई हूँ कई बार आग में फिर भी न हुई...
अगोड़ि-पिछोड़ि इन्सान कु नाता-इन्सानियत से, अगोड़ि च. हमरु स्वार्थ-हमरु दुखड़ा, सब पिछोड़ि च.. कबि- नि रैंदू एक जगा, यो- चंचल...
माटी पुष्प, अश्रु, नारी की कहानी हे! माटी तेरी भी क्या अजब कहानी, धरती पर ही तुझको हरियाली लानी। कितना...
साहित्यिक संस्था रुद्रपुर बुलंदी जज्बात ए कलम की ओर से 11 जुलाई से मैराथन कवि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा...
