वक्त तो गुजर जाता है वक्त तो गुजर जाता है, यूं कभी कहानी बनकर। अच्छी बुरी यादें रह जाती हैं,...
साहित्य
हम भी तो पत्थर जैसे पत्थर तेरी क्या गजब कहानी, कहीं तू इमारत की नींव बन बैठा। सहता गया छैनी...
रात भर मुझको सोचना छोड़ो। दिन में ख्वाबों को देखना छोड़ो।। दूर ही दूर होते जाओगे। दरमियां कुछ तो फासला...
एक अजब-सी उलझन में उलझी पड़ी हैं ज़िन्दगी न जाने की किस मंज़िल की तरफ भागे जा रहें न जाने...
क्या मेरे मन के आखर यूं ही क्या मेरे मन के आखर यूं ही, खुद में सिमटकर रह जाएंगे। लिखता...
पैंछु पठ्याळी करा धौं कुठार कु अन्न खवा धौं मातृभुमि छ तुम्हारी भू कानुन लावा धौं माधु कु त्याग समझा...
मेरे शब्द मैं अपने शब्दों को लिख चुका हूं, क्या कोई, मेरे शब्द सुन सकेगा। फंसा हूं क्यों शब्दों के...
हिम कवि आ रहा घर छोड़े वर्षों बीत गए, मैं हिमगिरि पर ही घूम रहा। याद दिलाती मुझे बहुत उनकी,...
जिंदगी वतन के नाम क्या है इंसान बता तेरी ये जिंदगानी, जो काम ना आए वतन के। मौके तो बहुत...
स्वानी स्वानी... स्वानी स्वानी मुखड़ि तेरी स्वानी भलि झलकी छै... म्येरा मन बसि मूरत जसि उसि तेरी सूरत सुकली छै......
