कान्हा की बांसुरी ओ कान्हा फिर से सुना दे बांसुरी। जो वंशी तूने वंशीवट में बजाई। जो वंशी तूने यमुना...
साहित्य
जो कुछ भी बाह्य घटित हो रहा होता है, यदि मन की उससे सहमति न हो रही हो और मनुष्य...
अग-जग धूम मच रही देखो, लगती कितनी मनभावन होली मीठी -मीठी गुजिया, भुजिया संग भीगी -भागी सी मस्त है होली॥...
नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 25 फरवरी से पांच मार्च तक आयोजित किए जा रहे विश्व पुस्तक मेले में...
मैं विद्यार्थी नहीं, मज़दूर हूँ! ओ कवियो! ओ लेखको! किसके लिए लिख रहे हो? मेरी दादी बन्नी-मजूरी करती थी अब...
हरिद्वार के डॉ. दिनेश शर्मा के शोध आलेख को इसी माह फिजी में होने वाले बारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में...
उत्तराखंड में बेरोजगारों के आंदोलन पर युवा कवयित्री अंजली चंद की कविता-आज का युवा सड़क मे भटक रहा है
आज का युवा सड़क मे भटक रहा है, वो अपने ही मित्र प्रशासन से पिट रहा है, उसे अब सही...
"बेरोजगार धै लगाणा छीं" यख सब बेरोजगार अब धै लगाणा छीं, ये नेता जी अपणी ही मवसी बणाणा छीं। बड़ी...
सृष्टि परमात्मा भी कितना सुन्दर रचनाकार है ? कितनी सुन्दर रची है प्रभु तुमने सृष्टि! जहां तक डालो दृष्टि बस...
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है कर अपनी ग्लानि को वो प्रत्यक्ष हमें बहुत...
