माँ के प्रति ढाई बर्ष से कौमा में है माँ माँ तुम्हारें बिना सारी खुशियां। बेमानी सी लगती हैं ॥...
साहित्य
प्रतिगामी ताकतों के खिलाफ एक जीवंत जन संस्कृति के विकास के जरिये ही व्यापक जन समुदाय के हितों की रक्षा...
माँ है ये मेरी, मैं हूँ नन्हा खिलौना। मैं खेलूँ ये बयाँ, हूँ तेरा ही छौना। हैं खुशियाँ ये तेरी-मेरी।...
ना जाने "मैं" क्यूं कभी कभी हिंदू "मैं", कभी मुस्लिम, कभी ईसाई हो जाता हूं, कभी सिक्ख "मैं", कभी पारसी,...
कभी-कभी लगता है प्रेम जैसी सरल भावना को कितना जटिल बना दिया गया है। जिसने भी प्रेम में पहले मरने...
देह पर दर्ज निशान! मैं, शरीर पर नीले निशान लेकर पैदा हुआ था। इन निशानों के बारे में सबके अपने...
किताबें (1) सबसे अच्छी यार किताबें। पढ़ली जिसने चार किताबें॥ कर देती होशियार किताबें। कागज पर लिखी दास्ताँ किताबें॥ सारे...
श्री पिताजी नम जयजय पिताजी नमः बोलो श्री पिताजी नमः... दिन भर करते मेहनत-2 चल देते अल सुबह।। बोलो श्री...
गांव और शहर के बीच अंतर अनेक तरह के होते हैं। शहर में रहने वाले लोगों के लिए अन्यथा समाज,...
देहरादून में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से आज श्रोताओं को हंसते हंसते...
