बुरा मान गए ज़रा आईना क्या दिखाया, बुरा मान गए। ज़रा चुनाव में क्या हराया, बुरा मान गए। चाहते तो...
साहित्य
बादलों का शामियाना आसमान में तन गया बादलों का शामियाना। सांवली छांव भी पसर गई धरा पर। कंटीली धूप भी...
स्त्री, औरत और महिला में क्या अंतर है? हमारी भाषा में सच तो यही है कि दो शब्द एक दूसरे...
रावण! रावण दहाड़ रहा है, सत्य के विरुद्ध मन के स्याह कोनों में! बाहर खड़ी है, कतारबद्ध, डरी-सहमी भीड़! उम्मीदें...
प्रेत के पांव मुझे अक्सर संदेह होता है कि मैं आदमी हूं! क्योंकि रास्ते में गिर जाती है मेरी नाक,...
मन पतवार बना लेती तुम होते जो सचमुच रुठे मैं तुम्हें मनाने आ जाती, नैया को मझधार छोड़ती मन पतवार...
थिरक थिरक... आ नाच बा नाच ला... बलि तुम कां छा ला....2 थिरक-थिरक नाच-नाच ला जम बे नाच ला...2 तकधिन......
ज़िंदगी लगी हांफने दौड - दौड़कर ज़िंदगी लगी हांफने। पथ लंबा मंज़िल अभी बहुत दूर है। थककर भी हम चलने...
देहरादून के प्रसिद्ध ऑर्थोपैडिक सर्जन और इंडियन ऑर्थोपैडिक एसोसिएशन के उत्तरांचल स्टेट चैप्टर के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बीकेएस संजय ने...
साहित्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति की ओर से रविवार को देहरादून में...
