अशोक आनन का गीत- ज़िंदगी लगी हांफने
ज़िंदगी लगी हांफने
दौड – दौड़कर
ज़िंदगी लगी हांफने।
पथ लंबा
मंज़िल अभी बहुत दूर है।
थककर भी
हम चलने को मज़बूर हैं।
लख अंधियारी
सुबह भी लगी कांपने।
छूट गया वो पीछे
साथी जो मिला।
भीड़ में खोया वो
छोड़ यह काफ़िला।
जीवन – संध्या
धूप भी लगी भागने।
पांव के छाले
सफ़र की है कमाई ।
जीवन के जुए में
हर सांस गंवाई ।
ज़िंदगी पांडव
जुए में लगी हारने।
सांसों की पोटली
लिए चल रहे हैं ।
उजाला करने
शमा से जल रहे हैं।
हवा भी आंख में
धूल लगी झोंकने।
कवि का परिचय
अशोक ‘आनन’, जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com



