छाले बेरोजगारी के हे पथिक! मत कर छालों की परवाह, आगे सफलता की मंजिल खड़ी है। दौड़ता जा कांटों भरी...
साहित्य
मैं आज भी जीवित हूं तो प्रभु तेरा ही रचा ये खेल है वरना कहां मैंने भरी आज तक इतनी...
बतावा बतावा य जड़ा- बड़ी , क्याकि हुयीं चा. टोका-टोकि घड़ि-घड़ी, क्याकि हुयीं चा. अपण - अपण बाटा, हिटड़ि द्या...
एक छोटा सा शब्द जिसमे मेरी जान बसती है, रोते हुए भी मेने मुकुराया हे जब मेरी माँ हंसती है...
वेदना मेरे मन की एक वेदना है मेरे मन में, पुछूं तो पूछूं किससे। कौन कोरोना का हल्ला मचा रहा...
वो लड़का साहब, वो बाहर से मुस्कुराता है, वो खुश भी है, पर न जाने क्यों, उस मुस्कुराहट के पीछे...
वाह ! भाई कोरोना। तू आ गया ! हम सदा ही जमीन पर भार रहे। जिंदा लाश का भार ढोते...
मृत्यु का यह मुख्यद्वार मुबारक यह चुनावी त्योहार मुबारक। यह ज़हरीली फुहार मुबारक मेरी इक इक साँसो का होता। तुमको...
दिन कर गये कविता से राम को धारण कर मन में, दिन कर गये कविता से। अर किरणों को बना...
पॉड़ि-पॉड़ि अबि त-कड़क रूड़ नि पड़ि, गौंम सूख पड़िगे. मौल्यार बगत-अबि बटि, निचट रूख पड़िगे.. गौं का स्वाता- पंदेरा ,...
