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October 17, 2026

दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’

लेखणु-पढ़णु लेखि- पैड़िक - मनखि, उतीरण-ह्वे जांद. सीखि-सीखी, काम-काजा परवीण-ह्वे जांद.. पढ़णा-लेखड़ा कि बल, क्वी उमर नि हूंदि. पुस्तैनी हुनर...

पुरणि-होऴि पैल्या होली- होरि छै, अब ह्वे ग्याई- हौरि. हुलियारौं-आंण देखिक, सरैल जांदा-डौरि.. तब- हुलयारौ आंद छा, गौं- गौं द्वारौं-...

ज्यूंदु छूं स्वींणा सास- बिस्वास दिलांद, ज्यूंदु छूं. सुवेर उठि - अफथैं जपकांद, ज्यूंदु छूं.. धार-छोड़ौं फरि अयूं, आज सब्यूं...

ब्यटलौं क भोऽर चल़णू , हमरु घर- संसार च. ब्यटलौं मीलु ऊं कु अधिकार, आज दरकार च.. ब्यटलौं न दे-लाड-प्यार,...