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May 18, 2026

हिम्स जॉलीग्रांट में 26 वर्षीय महिला की बच्चेदानी बचाकर की गई अत्याधुनिक की होल सर्जरी

चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने एक महिला की बच्चेदानी को सुरक्षित रखते हुए अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक लैप सैक्रोहिस्टेरोपेक्सी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। विशेष बात यह रही कि संस्थान में इस प्रकार की यह पहली की होल सर्जरी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

टिहरी गढ़वाल निवासी 26 वर्षीय गीता देवी लंबे समय से बच्चेदानी बाहर आने (यूटराइन प्रोलैप्स) की गंभीर समस्या से पीड़ित थीं। इस कारण उन्हें पेशाब और मल त्याग में कठिनाई के साथ-साथ दैनिक कार्यों में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई चिकित्सा केंद्रों पर कम उम्र के बावजूद उन्हें बच्चेदानी निकालने (हिस्टेरेक्टॉमी) की सलाह दी गई थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसके बाद मरीज हिम्स जौलीग्रांट की डॉ. प्रज्ञा खुगसाल से मिली। मरीज की उम्र और भविष्य को ध्यान में रखते हुए डॉ. प्रज्ञा खुगसाल ने बच्चेदानी को सुरक्षित रखने वाली आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया। 13 मई 2026 को दूरबीन विधि से की गई इस अत्याधुनिक सर्जरी में विशेष मेश की सहायता से बच्चेदानी को उसकी सामान्य स्थिति में मजबूती से स्थापित किया गया। साथ ही नीचे की कमजोर मांसपेशियों एवं सूजे हुए हिस्सों का सफल ईलाज किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस जटिल सर्जरी में डॉ. आकांक्षा देशवाली, डॉ. अंजली सोनकर, डॉ. निशिता ने सर्जिकल टीम में सहयोग दिया। एनेस्थीसिया से डॉ. कृति बिंदल व ममता ने योगदान दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिरा नौटियाल के मार्गदर्शन ने इस उपलब्धि को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

की होल सर्जरी से मरीज 24 घंटे में सामान्य
डॉ. प्रज्ञा खुगसाल ने बताया कि कम उम्र की महिलाओं में बच्चेदानी को सुरक्षित रखना न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि भविष्य की जीवन गुणवत्ता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि लेप्रोस्कोपिक तकनीक से मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव, छोटा चीरा और तेजी से रिकवरी जैसे कई लाभ मिलते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

की-होल तकनीक से हुई इस सफल सर्जरी के बाद मरीज ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर सामान्य रूप से चलने-फिरने लगीं और सामान्य भोजन लेने लगीं। ऑपरेशन के दौरान अथवा बाद में किसी प्रकार की कोई जटिलता सामने नहीं आई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं। मरीज एवं उनके परिजनों ने पूरी चिकित्सकीय टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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