राज्य आंदोलनकारियों ने आईएमपीसीएल मोहान को निजी हाथों में बेचने पर जताया आक्रोश, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजेंगे ज्ञापन
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण स्थित वाले एकमात्र उपक्रम एवं देश एवं प्रदेश की आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा बनाने वाली एकमात्र कंपनी आईएमपीसीएल मोहान का विनिवेश कर प्राइवेट हाथों दिए जाने पर राज्य आंदोलनकारी में भारी आक्रोश है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (CPSE) अल्मोड़ा जिले के मोहान (नैनीताल जिले के रामनगर के पास) में स्थित है। राज्य आंदोलनकरियों ने तय किया कि कल 29 मई को इस मामले में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे जाएंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
राज्य आंदोलनकारी की समस्याओं के समाधान एवं उन्हें एकजुट करने के उद्देश्य से राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं दर्जा राज्य मंत्री धीरेंद्र प्रताप रामनगर पहुंचे और राज्य आंदोलनकारियों के साथ बैठक की। लखनपुर स्पोर्ट्स क्लब में राज्य आंदोलनकारियों की राज्य सेनानी मंच रामनगर के संयोजक चंद्रशेखर जोशी की अध्यक्षता एवं प्रभात ध्यानी के संचालन में इस बैठक का आयोजन किया गया। इसमें राज्य आंदोलनकारियों ने इस बात को लेकर बहुत आक्रोश जताया गया कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाओं का निर्माण करने वाली देश की एकमात्र कंपनी आईएमपीसीएल मोहान को मुनाफा देने के बावजूद मोदी सरकार ने कौड़ी के दामों पर एक प्राइवेट कंपनी को बेच दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बैठक में कहा गया कि वहां लंबे समय से सेवा दे रहे स्थाई एवं अस्थाई कर्मचारियों तथा किसानों के रोजगार एवं रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है। राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने पौड़ी संसदीय क्षेत्र के सांसद, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, नैनीताल सांसद अजय भट्ट, पौड़ी गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, सल्ट विधायक महेश जीना, नैनीताल विधायक सरिता आर्य, रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट से अपना मौन तोड़कर आईएमपीसीएल को बचाने के लिए आगे आने को कहा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यदि सांसद विधायक कारखाने को बचाने आगे नहीं आते हैं तो जनता इनको इस्तीफा देने के लिए मजबूर करें। राज्य आंदोलनकारी में इस बात को लेकर भी रोष है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बावजूद भी राज्य आंदोलनकारी एवं उनके आश्रितों को 10% क्षैतिज आरक्षण का लाभ अभी तक नहीं मिल रहा है। वर्ष 21 तक जमा चिह्ननीकरण के आवेदनों पर जनपदों के जिलाधिकारियों के द्वारा उनका निस्तारण नहीं किया जा रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि कल 29 मई को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भेजा जाएगा। बैठक में इंद्र सिंह मनराल, अनिल अग्रवाल, हाफिज सईद अहमद, नवीन नैथानी आदि भी उपस्थित थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


