चांद पर शहर बसाने के सपने को झटका, सिकुड़ रहा चांद, भूकंप और भूस्खलन से बिगड़ रही तस्वीर
चांद पर शहर बसाने का सपना देख रहे अमेरिका को बड़ा झटका लगने वाली खबर है। पृथ्वी का सबसे नजदीकी पड़ोसी चंद्रमा सिकुड़ रहा है। एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। हालांकि इसके बारे में हमें चिंता करने की जरुरत नहीं है। यूएसए टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन के सह-लेखक मैरीलैंड यूनिवरिस्टी के निकोलस श्मेर ने बताया कि इसका पृथ्वी पर जैसे ग्रहण, पूर्णिमा या ज्वारीय चक्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सौ मिलियन साल में 150 फीट सिकुड़ गया चांद
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सौ मिलियन वर्षों में, चंद्रमा की परिधि केवल लगभग 150 फीट सिकुड़ी है। इस सिकुड़न का कारण इसके कोर का धीरे-धीरे ठंडा होना है। अध्ययन में पाया गया कि चंद्रमा का गर्म आंतरिक भाग धीरे-धीरे ठंडा हो रहा है, जिससे चंद्रमा के सिकुड़ने पर चंद्र सतह पर रेखाएं या दरारें बन रही हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
फॉल्ट लाइन की पहचान
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की जांच करने वाले शोधकर्ताओं ने फॉल्ट लाइन्स की पहचान की है। इनके खिसकने से करीब 50 साल पहले एक बड़ा चंद्रमा भूकंप आया था। ये वो जगह है, जहां नासा के मिशन आर्टेमिस-3 की 2026 में लैंडिंग होनी है। यहीं पर नासा इंसानी बस्ती बसाने की योजना बना रहा है, ऐसे में उसके सपने को भी झटका लग सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धरती की तरह की आते हैं चांद में भूकंप के झटके
लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अपोलो मिशन अपने साथ भूकंपमापी यंत्र ले गए थे। 13 मार्च, 1973 को एक विशेष रूप से तीव्र चंद्रभूकंप ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सामान्य दिशा से उन भूकंपमापी यंत्रों को हिला दिया। इसके दशकों बाद चंद्र टोही ऑर्बिटर ने दक्षिणी ध्रुव पर उड़ान भरी और फॉल्ट लाइनों का एक जाल देखा। नए मॉडलों के साथ शोधकर्ताओं ने इसे चंद्रमा के भूकंप से जोड़ा है। यह शोध स्पष्ट करता है कि सामान्य तौर पर चंद्रमा के भूकंप भी धरती के भूकंप के झटकों की तरह ही होते हैं। चंद्रमा के मामले में वे सिकुड़न के कारण चंद्रमा की सतह पर बनने वाली सिलवटों के कारण होते हैं। चंद्रमा के सिकुड़ने का मूल कारण यह है कि पिछले कि बीते हजारों सालों में चंद्रमा का आंतरिक भाग ठंडा हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिकुड़न किशमिश की तरह मुरझाने जैसी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पृथ्वी की तुलना में चांद की सतह में अंतर
चंद्रमा के सिकुड़ने की एक वजह ये भी है कि चांद की सतह पृथ्वी की तुलना में कम कसी हुई है, इसमें अक्सर ढीले कण होते हैं जिन्हें ऊपर फेंका जा सकता है और प्रभाव से इधर-उधर बिखेरा जा सकता है। इसके नतीजा ये होता है कि धरती के भूकंप की तुलना में चंद्रमा के भूकंप से भूस्खलन होने की संभावना ज्यादा होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जैसे-जैसे इंसान ये सोच रहा है कि वह चंद्रमा पर बस्ती बसाएगा तो उसे इस संभावना के लिए भी योजना बनानी होगी कि उसके पांव के नीचे की जमीन उतनी स्थिर है कि नहीं, जितनी वे उम्मीद कर रहे हैं। शोधकर्ताओं का मॉडल बताता है कि शेकलटन क्रेटर की दीवारें भूस्खलन के लिए बहुत संवेदनशील हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को लेकर ये नए शोध सामने आए हैं, जो नासा के आर्टेमिस मिशनों के लिए संभावित लैंडिंग साइट है। जैसे-जैस क्रू आर्टेमिस मिशन की लॉन्च तिथि के करीब पहुंच रहे हैं। अंतरिक्ष यात्रियों और बुनियादी ढांचे को यथासंभव सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि चिंता की एक बात है कि सिकुड़ता चंद्रमा चंद्रभूकंप का कारण बन सकता है। यह भविष्य के किसी भी अंतरिक्ष यात्री के लिए खतरनाक हो सकता है जो चांद पर उतरने या वहां रहने की कोशिश करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की सतह में आई विकृति
एक बयान में भूविज्ञानी और शोधकर्ताओं में से एक निकोलस श्मेर ने कहा है कि हम चंद्रमा पर इंसान का इंतजार कर रहे हैं और उसके लिए तैयारी कर रहे हैं। ऐसी इंजीनियरिंग संरचनाएं बनाना जरूरी है जो चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधि को बेहतर ढंग से झेल सकें और खतरनाक क्षेत्रों में लोगों की रक्षा कर सकें। मैरीलैंड यूनिवर्सिटी की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, चंद्रमा के सिकुड़ने से इसके दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की सतह में उल्लेखनीय विकृति आ गई है। इसमें वह इलाका भी शामिल हैं जिसे नासा ने क्रू आर्टेमिस III लैंडिंग के लिए प्रस्तावित किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यह अध्ययन पिछले सप्ताह प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ था। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के वैज्ञानिक एमेरिटस टॉम वॉटर्स ने कहा कि चंद्रमा पर बहुत सारी गतिविधियां चल रही हैं। यह कुछ ऐसा है जिसे हमें ध्यान में रखना होगा विशेष रूप से तब जब हम चंद्रमा पर दीर्घकालिक चौकियों के लिए योजना बना रहे हो। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दक्षिणी ध्रुव के पास भूकंप के संकेत
अध्ययन में विशेष रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ध्यान दिया गया, जो भविष्य के नासा के आर्टेमिस मिशनों के लिए संभावित लैंडिंग साइट है। वॉटर्स ने कहा, ‘अपोलो भूकंपीय डाटा से हमें यह भी पता चला कि सबसे शक्तिशाली चंद्रमा भूकंप, एक उथला चंद्रमा भूकंप दक्षिणी ध्रुव के पास हुआ था। वॉटर्स ने कहा, ‘ये भूकंप उसी चंद्र क्षेत्र में ढलानों को भूस्खलन के लिए अतिसंवेदनशील बना सकते हैं। साथ ही संभवतः चंद्रमा की सतह पर भविष्य के लैंडिंग स्थलों को भी खतरे में डाल सकते हैं।
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