पढ़िए स्वतंत्र विधा में युवा कवयित्री की रचना-बेटी का संदेश
फरिश्तों के घर से ,
फलक से उतर के ।
मैं किसी के घर आई ,
किसी की गोदी में समाई ।।
किसी के चेहरे पर मुस्कान लाई
भरकर दिल में बड़ा प्यार लाई ।
मां ने मुझको गले से लगाया ,
पापा ने गोदी में झूला झुलाया ।।
किसी की खुशी का प्यारा सितम ,
किसी ने कहा मैं परायों का धन।
किसी ने कहा नाम रोशन करेगी ,
कोई कहे इससे लागे ना मन ।।
कदमों पे मेरे खड़े कितने दुश्मन ,
गलती क्या मेरी समझ न पाती ।
मैं जानती हूं या मां जानती है ,
अकेले दुनिया से लड़ नहीं पाती ।।
किसी ने कहा बेटी स्कूल जाना ,
कोई कहे व्यर्थ इसको पढ़ाना ।
हक पर डटना दुनिया से लड़ना ,
जगना तू बेटी व सब को जगाना।
मैंने कहा रोक कितनी भी आए ,
चाहे घिरे आस खोती घटाएं ।
मैं मुश्किल चुनूंगी रस्ते सदा ही ,
लड़ती रहूंगी हंसते सदा ही ।।
………किरन पुरोहित हिमपुत्री
लेखिका का परिचय —
नाम – किरन पुरोहित “हिमपुत्री”
पिता – श्री दीपेंद्र पुरोहित
माता – श्रीमती दीपा पुरोहित
जन्म – 21 अप्रैल 2003
आयु – 17 वर्ष
अध्ययनरत – कक्षा 12वीं उत्तीर्ण
निवास, कर्णप्रयाग चमोली उत्तराखंड।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।