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October 16, 2026

पढ़िए जनकवि डॉ. अतुल शर्मा की लघु कविताएं

एक—-
बच्चे ने
आंसुओं मे डूबी नाव सी आंखों से मां को देखा
बच्चे को बहता दिखा अफनि चेहरा

दोनो एक दूसरे को
किनारे की तरह
देखये रहे

दोनो की बांहें
पुल बन ग ईं।

दो—

पानी के झरने सूख रहे हैं पहाड़ पर
चिड़िया और तितलिया नहीं दिखती पहाड़ पर
जल रहे जंगल को कहीं जल नहीं मिला
प्रश्नो के खेत सूख गये हल नहीं मिला ।

घूमने को आ गये बादल पहाड़ पर
लो पहाड़ ही पहाड़ है पहाड़ पर।
_डाअतुल शर्मा

तीन—-

छत को कोई सामान नही चाहिए

नहीं चाहिए सोफा पंलग न बिजली
छत के पास है सुबह से शाम तक का सूरज
रात की रोशनी
बादल और नीला आकाश

छत के पास है दूसरी छत
छतो से भरी दुनियां

छत पर महसूस होते है मौसमो के कपड़े

छते हैं बिना खिड़कियों की तरह पारदर्शी ।

कवि का परिचय
डॉ. अतुल शर्मा (जनकवि)
बंजारावाला देहरादून, उत्तराखंड
कविता संग्रह
थकती नही कविता, बिना दरवाजो का समय, सींचेगी नीव नदी, एक लम्बी कविता-बोल रे मौसम कितना पानी, वह गश्त पर है, अब तो सड़को पर आओ (जनगीत संग्रह ) आदि ।
साथ ही उपन्यास लम्बी कहानी और संस्मरण पुस्तकें।

Bhanu Prakash

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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।