युवा कवयित्री प्रीति चौहान की कविता-मुस्कुराते हुए चेहरे बड़ी संजिदगी से छुपा जाते है कई राज
मुस्कुराते हुए चेहरे बड़ी संजिदगी से छुपा जाते है कई राजएक हल्की मुस्कान के पीछे दब जाते हैं..
कई टूटे सपनो का दर्द
अनगिनत ख्वाहिशो के टूटने की आवाज़।
एक हल्की मुस्कान समेट लेती अपने अंदर कितना कुछ…..
गमों का सैलाब
असफलताओं का शौर
और दुःखो मे बहते आंसुओ का दरिया।
मुस्कराहट के पीछे छिप जाती है
जीवन- मरण की कशमकश….
जिंदगी की अनेक असमंजस…..
बड़ी आसानी से यकीन दिलाया जा सकता है सबको कि सब ठीक है
बस किसी के पूछने पर कि कैसे हो?
मुस्कुरा कर कह दिया जाए अगर कि सब ठीक है
तब सब मान लेते है कि सब ठीक है।
इतना वक्त नहीं किसी के पास कि तुम्हारे उत्तर पर फिर से प्रश्न किया जा सके।
कवयित्री का परिचय
नाम-प्रीति चौहान
निवास-जाखन कैनाल रोड देहरादून, उत्तराखंड
छात्रा- एमकेपी पीजी कॉलेज देहरादून से बीए करने के बाद अब आगे की पढ़ाई की तैयारी।



