युवा कवि विनय अन्थवाल की कविता-हम सब मिलकर दीप जलाएँ
हम सब मिलकर दीप जलाएँइस दिवाली नव दीप जलाएं
मन के आँगन को महकाएं।
मन के तम को दूर हटाकर
ज्ञान का भी दीप जलाएं।
राग-द्वेष मद लोभ मिटाकर
अपने मन को विमल बनाएं।
मलिन मन को स्वच्छ बनाकर
विमलता का दीप जलाएं।
जीवन को सात्विक बनाएं
सत्य पथ पर कदम बढ़ाएँ।
प्रेम सागर में डूबकर के
प्रेम सुधा का दीप जलाएं।
सद्भाव से सन्मार्ग चलकर
स्वभाव को सरल बनाएं।
नेह नजर से देखें सबको
मन में नेह का दीप जलाएं।
श्रीराम सा मर्यादित होकर
भारत माँ का मान बढ़ाएँ।
मर्यादा का कवच पहनकर
राम नाम का दीप जलाएं।
कवि का परिचय
नाम -विनय अन्थवाल
शिक्षा -आचार्य (M.A)संस्कृत, B.ed
व्यवसाय-अध्यापन
मूल निवास-ग्राम-चन्दी (चारीधार) पोस्ट-बरसीर जखोली, जिला रुद्रप्रयाग उत्तराखंड।
वर्तमान पता-शिमला बाईपास रोड़ रतनपुर (जागृति विहार) नयागाँव देहरादून, उत्तराखंड।



