राजीव गांधी फाउंडेशन की प्रतियोगिता में देहरादून के प्रतिभागियों ने जीते पुरस्कार
राजीव गांधी फाउंडेशन के तत्वाधान में राजीव गांधी स्टडी सर्किल की ओर से आयोजित हरा भरा स्वराज कार्यक्रम में जवाहर भवन दिल्ली में उत्तराखंड स्टूडेंट्स सेक्रेटरी सुप्रिया धस्माना के नेतृत्व में 25 सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने प्रतिभाग किया। अखिल भारतीय स्तर की इस प्रतियोगिता में पर्यावरणीय मुद्दों पर केस स्टडी में दस प्रथम विजयी प्रतियोगियों में उत्तराखंड की उन्नति केष्टवाल को सातवां पुरस्कार, पर्यावरणीय मुद्दों पर बेहतरीन प्रश्न पूछने वाले विजयी पंद्रह प्रयोगियों में उत्तराखंड के ग्राफिक एरा के अतुल कुमार नैथानी और डीएवी पीजी कॉलेज के आयुष रावत को पांचवां व सातवां पुरस्कार मिला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रतिभागियों को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में लोक सभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संबोधित किया। इस अवसर पर राजीव गांधी फाउंडेशन के चेयरमैन एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, ट्रस्टी सुमन दुबे, विजय महाजन, प्रोफ़ेसर सतीश राय, सौरभ राय ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजिका डाक्टर चयनिका उनियाल ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरा भरा स्वराज एक राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति युवा पीढ़ी को जागरूक करने के अभियान का हिस्सा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग व जल वायु परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय विषय हैं जिन पर पूरी दुनिया में आज बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर देश भर के युवा विद्यार्थियों ने अपने जो विचार इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते हुए भेजे हैं, वो इस दृष्टि से बहुत उत्साहवर्धक हैं कि आज की युवा पीढ़ी इन विषयों के बारे में सकारात्मक सोच रखती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर समापन सत्र का संचालन करते हुए उत्तराखंड प्रदेश की राजीव गांधी स्टडी सर्किल स्टूडेंट सेक्रेटरी सुप्रिया धस्माना ने कहा कि वह ऐसे प्रदेश से आती हैं जो विश्वविख्यात पर्यावरणविद पद्मविभूषण सुंदर लाल बहुगुणा व चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी की जन्मभूमि है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने नब्बे के दशक में दो भयंकर भूकंप, वर्ष 2013 की विनाशकारी केदारनाथ आपदा देखी व झेली है। जिस प्रदेश का 67 प्रतिशत भूभाग वन भूमि है। उन्होंने कहा कि गंगा जमुना शारदा जैसी पवित्र नदियों , राष्ट्रीय पार्कों व राष्ट्रीय अभिहारण्य वाले प्रदेश में हम समझ सकते हैं कि वन वन जीव व जल और जमीन का क्या महत्व है। सुप्रिया धस्माना ने कहा कि आने वाले समय में इस तरह का सेमिनार उत्तराखंड में भी आयोजित किया जाएगा।
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