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July 11, 2026

नैनीताल हाईकोर्ट ने एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के संबद्धता समाप्त करने के निर्णय पर लगाई रोक, डीएवी कॉलेज की याचिका पर दिया आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के 30 मई को कार्य परिषद में लिए गए निर्णय पर स्टे लगा लगा दिया है। ये स्टे डीएवी पीजी कॉलेज की याचिका पर लगाया गया है। दरअसल, केंद्रीय एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने प्रदेश के 10 अशासकीय डिग्री कॉलेजों की संबद्धता खत्म कर दी थी। अब विवि से जुड़े 72 प्राइवेट कॉलेजों की संबद्धता को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इससे उत्तराखंड में तो छात्रों में कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। वहीं, निजी कॉलेज भी सरकार की नीति को लेकर परेशान हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डीएवी कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में दस अशासकीय महाविद्यालयों को असंबद्ध करने के फैसले को चुनौती दी थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया। डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केआर जैन ने पुष्टि की। हाई कोर्ट ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से डीएवी कॉलेज देहरादून सहित नौ अन्य कॉलेजों की सम्बद्धता समाप्त करने के विरुद्ध डीएवी कॉलेज मैनेजमेंट की याचिका पर सुनवाई की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने सम्बद्धता समाप्त करने के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार, केन्द्र सरकार व गढ़वाल केंद्रीय विवि से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। खंडपीठ ने केवल डीएवी कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने के आदेश पर ही रोक लगाई है, अन्य कॉलेजों पर नहीं। इस मामले में डीएवी कॉलेज की ओर से दयाचिका दायर की गयी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डीएवी कॉलेज प्रबंधन ने याचिका दायर कर कहा है कि हेमवतीनन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर की कार्यपरिषद ने डीएवी कॉलेज सहित नौ अन्य कॉलेजों की सम्बद्धता समाप्त कर दी। जिसमें देहरादून के कई बड़े कॉलेज भी शामिल हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आदेश में यह भी कहा गया है कि कॉलेजो की संबद्धता समाप्त करते हुए उनकी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से नाम हटाने के आदेश भी दे दिए हैं। इसकी वजह से हजारों छात्रों के भविष्य पर खतरा उतपन्न हो गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय ने बिना किसी कॉलेज का पक्ष सुने, ना ही नियमावली का अवलोकन किए संबद्धता समाप्त कर दी। इसलिए इस आदेश पर रोक लगाई जाए।
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