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July 24, 2026

खुश नहीं हैं महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी, उन्हें नहीं लगता कि वह सही जगह पर हैं

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि राज्यपाल बनने के बाद वह नाखुश हैं और उन्हें लगता है कि वह सही जगह पर नहीं हैं। कोश्यारी ने कहा कि मैं दुखी हूं, खुश नहीं हूं। उन्हें खुशी और सही जगह तभी महसूस होती है जब राजभवन में सन्यासी या मुमुक्षरत्न आते हैं। कोश्यारी ने ये बात जैन समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान कही। उन्होंने सरकार से भविष्य में तीर्थ उद्योग लगाने का अनुरोध भी किया। राज्यपाल ने कहा कि मैं सरकार से ‘पर्यटन मंत्रालय’ की तरह एक तीर्थ मंत्रालय बनाने का अनुरोध करता हूं। क्योंकि तीर्थ की अपनी गरिमा होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राज्य पर्यटन विभाग की ओर से राजभवन में ‘पवित्र जैन तीर्थ दर्शन सर्किट’ का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और पर्यटन मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और वैष्णोदेवी मंदिर बोर्ड के सदस्य महामंडलेश्वर श्री विश्वेश्वर आनंद गिरि जी महाराज भी उपस्थित थे। भगत सिंह कोश्यारी को सितंबर 2019 में महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पहले भी कोश्यारी के बयानों पर हुआ बवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब भगत सिंह कोश्यारी का बयान सुर्खियों में हो। इससे पहले उन्होंने 19 नवंबर को औरंगाबाद में एक यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में शिवाजी को पुराने दिनों का आइकॉन कहा था। कोश्यारी के साथ इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नितिन गडकरी और NCP प्रमुख शरद पवार भी मौजूद थे। उन्होंने भरी सभा में बाबासाहेब आंबेडकर और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को नए जामने का आइकन बताया था। इस बयान के बाद विपक्ष के नेता उन पर हमलावर हो गए और उनका इस्तीफा मांगने लगे। भाजपा के समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बना चुके शिंदे गुट ने भी कोश्यारी के बयान का विरोध किया था।