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July 14, 2026

कुंभ मेले की विधिवत शुरुआत, 30 अप्रैल तक चलेगा मेला, होंगे तीन शाही स्नान, पहले दिन कम दिख रही भीड़, ये हैं नियम

कोरोना के चलते चार महीने तक चलने वाले हरिद्वार कुंभ मेले को इस बार एक माह में समेट दिया गया है। एक अप्रैल से कुंभ मेले की विधिवत शुरूआत हो गई है।


कोरोना के चलते चार महीने तक चलने वाले हरिद्वार कुंभ मेले को इस बार एक माह में समेट दिया गया है। एक अप्रैल से कुंभ मेले की विधिवत शुरूआत हो गई है। पहले दिन ज्यादा संख्या में श्रद्धालु नजर नहीं आ रहे हैं। इससे पहले सामान्य दिनों में भी इतनी की भीड़ जुटती थी। सुबह तक हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों में कम भीड़ रही। दिन चढ़ने के साथ अब लोगों की संख्या धीरे धीरे बढ़ रही है।

इस बार कुंभ मेला अवधि में तीन शाही स्नान और दो पर्व स्नान होंगे। कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट साथ लाना अनिवार्य किया गया है। इधर, अखाड़ों ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। दो अप्रैल से अखाड़ों में धर्मध्वजा लगाने और पेशवाई निकालने का दौर भी शुरू हो जाएगा। सात अखाड़ों की पेशवाई निकाली जा चुकी है, अभी छह और अखाड़े पेशवाई निकालेंगे।
ये हैं नियम
नैनीताल उच्च न्यायालय और राज्य सरकार की ओर से कुंभ मेला के लिए जारी एसओपी के अनुसार कुंभ मेला के दौरान हरिद्वार आने वाले सभी श्रद्धालुओं को कोविड-19 की 72 घंटे के अंतराल की आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य है। इसके बिना किसी को भी हरिद्वार में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए मेला अधिष्ठान ने बुधवार से ही सीमाओं पर जांच शुरू कर दी है। बगैर जांच रिपोर्ट के हरिद्वार आने वाले लोगों को सीमावर्ती इलाकों से वापस भेजा जा रहा है। सभी चेक पोस्ट पर अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती की गई है। सीमा पर कोराना जांच की भी व्यवस्था की गई है।


सीमाओं के साथ ही बस अड्डे पर हो रही चेकिंग
रोडवेज बस अड्डे, हरिद्वार जिले की सीमाओं, रेलवे स्टेशन आदि पर हर व्यक्ति की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट चेक करने के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा है। वहीं, लोगों के रैंडम कोरोना टेस्ट भी किए जा रहे हैं। फिलहाल ज्यादा लोग नहीं आने के कारण स्थिति नियंत्रण में नजर आ रही है।
शाही स्नान के लिए क्रम तय
12 अप्रैल और 14 अप्रैल को होने वाले शाही स्नान के लिए अखाड़ों का क्रम भी तय कर दिया गया है। निरंजनी अखाड़ा सबसे पहले स्नान करेगा। जबकि निर्मल अखाड़ा सबसे आखिर में स्नान करेगा। इन दोनों शाही स्नानों में सभी 13 अखाड़ों के संत-महात्मा और नागा संन्यासी पूरे वैभव के साथ स्नान करेंगे। अन्य किसी को इस दौरान हरकी पैड़ी पर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। पर्व स्नान में इस तरह की पाबंदी नहीं होगी।
शाही स्नान
12 अप्रैल – सोमवती अमावस्या
14 अप्रैल – वैशाखी
27 अप्रैल – चैत्र पूर्णिमा
पर्व स्नान
13 अप्रैल – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
21 अप्रैल – राम नवमी